कभी गली- गली जाकर बेचते थे भुजिया और रसगुल्ले, आज “Bikanervala” के नाम से है मशहूर


भारत देश में जब कोई किसी त्यौहार का अवसर  होता है तो सबके घरों में बीकानेर की मिठाई और भुजिया ज़रूर लायी जाती है , दिवाली के अवसर पर भी लोगों को उपहार के साथ-साथ बीकानेर का डब्बा ज़रूर दिया जाता है , आज भारत देश के कोने-कोने में बीकानेरवाले का नाम सब जानते है पर हम आपको बताने जा रहे है  जो कंपनी आज इतनी बड़ी बन चुकी है उसकी शुरुआत कैसे हुई थी |

1995 में हुई थी शुरुआत 

इस वक्त  83 साल के हो चुके केदरनाथ अग्रवाल बीकानेर कंपनी के मालिक है , 1955 में वो अपने बड़े भाई सत्यनारायण अग्रवाल के साथ राजस्थान के बीकानेर से दिल्ली आये थे शुरआती दिनों में जब उनके पास रहने की जगह नहीं थी तो वो धर्मशाला में रहते थे कुछ दिनों बाद उन्होंने रोज़गार के लिए अपने भाई के साथ दिल्ली की गलियों में बाल्टी में रसगुल्ले भर कर और ेल पोटली में भुजिया बांध कर बेचना शुरू कर दिया |

बढ़ने लगी बिक्री

धीरे-धीरे हर तरफ उनकी नमकीन-भुजिया लोगों को पसंद आने लगी और उनकी खूब बिक्री होने लगी जिसके बाद उन्होंने एक दुकान को किराये पर ले लिया , उनके कस्टमर बढ़ने लगे थे इसलिए उन्होंने बीकानेर से कारीगरों को भी बुलवा लिया , कुछ समय बाद उनकी दुकान पूरी दिल्ली में चर्चित हो गई क्यूंकि लोगों को उनकी मिठाई और नमकीन का स्वाद काफी पसंद आने लगा था |

दुकान का नाम बदला 

 

उन्होंने अपनी दूकान का नाम ‘बीकानेर भुजिया भंडार’ रखा था पर जब उनकी दूकान प्रसिद्ध होना शुरू हुई तो उनके बड़े भाई ने उन्हें सलाह दी की उन्हें अपनी दूकान का नाम बदलकर ‘बीकानेरवाला’ रख लेना चाहिए | कुछ समय बाद उनकी दूकान इसी नाम से मशहूर हो गई जिसके बाद उन्होंने दिल्ली के करोल बाग में अपनी खुद की एक दूकान खरीद ली |

आज विश्वभर में है प्रसिद्ध 

इसके बाद उनका बिज़नेस इतना बढ़ गया की आज के समय में उनका सालाना बिज़नेस टर्नओवर ही 1000 करोड़ का है | आज उनकी मिठाई और नमकीन सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विश्वभर में प्रसिद्ध हो चुकी है | हर इंसान की पहली पसंद बीकानेर की मिठाई और नमकीन ही है आज |