क्यों दीखते है पहलवानों के कान सबसे अलग, यहां जानिए इसके पीछे का राज़


भारत के कई पहलवानों ने ओलंपिक्स में मैडल जीत कर देश का नाम रोशन करा है फिर चाहे वो सुशिल कुमार हो , बजरंग पूनिया साक्षी मालिक या फिर गीता और बबिता फोगाट, इन सभी ने कुश्ती में खूब नाम कमाया है | अगर आपने इन सभी के रेसलिंग मैच को ध्यान से देखा है तो आपने एक चीज़ ज़रूर नोटिस की होगी की इन सभी के कान कुछ अलग दीखते है | सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि अगर आप विदेशी wrestlers के भी कान देखेंगे तो आपको अलग ही नज़र आएंगे |

क्यों अलग होते है पहलवानों के कान 

इन सभी एक कानों को देख कर ऐसा लगता है की वो सूजे हुए है और उनकी खाल भी काफी मोटी नज़र आती है | दरहसल ऐसे कानों की कंडीशन को Cauliflower Ear कहा जाता है | जब कोई शख्स बहुत ज़्यादा फिजिकल काम करता है तो उसके शरीर का temperature काफी बढ़ जाता है जिस वजह से अगर उस समय उनके कान पर ज़रा सा भी टच किया जाये तो उससे कान की हड्डिया टूट जाती है |

इस वजह से कानों पर पड़ता है असर 

जब पहलवान Wrestling करते है तो बहुत ज़्यादा फिजिकल वर्क होता है और तो और कुश्ती के दौरान उनके कान कई बार ज़मीन पर भी रगड़ जाते है और कभी कभी दूसरे पहलवान का हाथ या फिर पैर उनके कान पर लग जाता है | कुश्ती के दौरान तो कुछ नहीं पता चलता पर बाद में जब कान ठंडा होता है तब बहुत दर्द होता है और तब पता चलता है की कान टूट गया है |

कान दिखने लगते है अलग 

इस वजह से कान की बनावट भी बदल जाती है जिस वजह से पहलवानों के कान अजीब लगने लगते है हालांकि इससे कान के सुनने की क्षमता पर कोई फर्क नहीं पड़ता है | कई wrestlers के कान कुश्ती के दौरान टूट जाते है पर अगर वो सेफ्टी के लिए कोई गार्ड पहन ले तो उनके कान टूटने से बच सकते है |