भारत में ओलंपिक क्यों नही होता है? क्रिकेट क्यों नही ओलंपिक का हिस्सा


भारत में ओलंपिक क्यों नही होता है? क्रिकेट क्यों नही ओलंपिक का हिस्सा – नमस्कार, आज हम बात करेंगे की भारत में ओलंपिक (Olympic)  क्यों नही होता है, आखिर भारत में अभी तक ओलंपिक का आयोजन क्यों नही किया गया, क्या भारत ओलंपिक Olympic का आयोजन कर नही सकता है? और साथ ही जानेंगे की क्रिकेट ओलंपिक का हिस्सा क्यों नही है। ओलंपिक से जुडी कई दिलचस्प बातें आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे। भारत में अभी तक ओलंपिक का आयोजन नही किया गया है, हालाँकि कॉमनवेल्थ जैसे गेम्स का आयोजन भारत में हो चूका है। लेकिन ओलंपिक अभी तक भारत में नही हुआ, चीन में ओलंपिक हो चूका है साथ ही चीन के अलावा जापान, इटली, साउथ कोरिया और फ़िनलैंड जैसे छोटे देश भी ओलंपिक गेम्स की सफलतापूर्वक मेजबानी कर चुके है। ओलंपिक 4 साल में एक बार होता है लेकिन भारत में अब तक ओलंपिक नही हो पाया है और भारत में ओलंपिक Olympic न होने के कई कारण है। बता दे की ओलंपिक गेम्स को आयोजन (organise) करने के लिए बहुत सारे पैसो की जरूरत होती है, बहुत पैसा यानि की बहुत ज्यादा पैसे की जरूरत होती है। हालाँकि इसके बाद जो बिजनिस होता है, देश में टूरिस्ट आते है उससे बहुत सारा प्रोफिट भी होता है लेकिन इसके लिए इन्वेस्टमेंट बहुत ज्यादा चाहिये होता है।

भारत में ऐसे बहुत सारे स्पोर्ट्स है जो ओलंपिक में नही खेले जाते है और सारे ऐसे भी गेम्स है जो ओलंपिक में खेले जाते है लेकिन भारत में नही खेले जाते है और अगर इन्हें खेला भी जाता है तो बहुत ही छोटे स्तर पर खेला जाता है। तो उन स्पोर्ट्स या गेम के लिए स्टेडियम बनवाना होता है और ये लगभग हर ओलंपिक में होता है क्योंकि हर देश के पास या उसके हर शहर में हर तरह के खेल खेलने के लिए स्टेडियम या इंफ्रास्ट्रकचर होगा ऐसा होना नामुमकिन सी बात है। तो सबसे पहले उन सभी गेम्स के लिए स्टेडियम बनवाने होते है जिसमे बहुत ज्यादा पैसा खर्च होता है। लेकिन फिर जब ओलंपिक खत्म हो जाते है तो ये स्टेडियम ऐसे ही खाली पड़े रहते है वहां कोई नही जाता है और यह स्टेडियम बाद में किसी के काम भी नही आते है, ऊपर से इनके मेंटेनेंस (रख-रखाव) में अलग से पैसा खर्च होता है, तो ये एक तरह से पैसों की बर्बादी होती है।

इसके अलावा इस बार जो ओलंपिक होगा उसमे 20 बिलियन डॉलर से ज्यादा की लागत आ सकती है और इस समय इतना पैसा खर्च (Expense) करना इंडियन इकॉनमी के लिए शायद बिलकुल भी अच्छा नही होगा। ओलंपिक के दौरान ओलंपिक विलेज, मीडिया हाउस, ट्रांसपोर्टेशन के अलावा 35 अलग अलग venues की जरूरत पड़ती है, जिन्हें बनाने में बहुत खर्च होता है। हालाकिं इंडिया जैसी ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लिए किसी इवेंट पर 15 से 20 बिलियन डॉलर खर्च करना कोई बड़ी बात नही है और यह बात सच भी है। लेकिन इतना बड़ा अमाउंट खर्च करने के बाद भी उस देश को कुछ भी रीटर्न में नही मिलता है।

पहले जो सिटी ओलंपिक की मेजबानी करती थी वो अरबों रूपए की कमाई टीवी राइट्स के जरिये करती थी। बता दे की ओलंपिक जैसे गेम्स पूरी दुनिया में अलग अलग टीवी चैनल पर टेलीकास्ट किये जाते है हर दिन अरबों लोग इन्हें टीवी पर देखते है, तो उनकी टीवी राइट्स, एडवरटाइजिंग और मीडिया राइट्स के जरिये अरबों रूपए की कमाई हो जाती थी। लेकिन धीरे धीरे इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (International Olympic Committee) टीवी राइट्स में अपना हिस्सा बढ़ाती जा रही है और इस कारण सिटी के लिए कुछ नही बचता है। बता दे की पहले इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी पुरे मीडिया राइट्स रेवेन्यू का 4% पैसा लेती थी, लेकिन ये 4% 2016 के रियो ओलंपिक्स में 70% हो गया और जिस कारण मीडिया राइट्स के जरिये सिटी की कमाई बंद हो गयी और इनकम का एक मुख्य स्त्रोत (Main Source) था, इसके अलावा जिस सिटी में ओलंपिक का आयोजन होगा वहां ओलंपिक विलेज बनाया जाता है और इसके लिए वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्टर चाहिए होता है। फिर उस जगह दुनियाभर से लाखों की तादात में टूरिस्ट आते है और रियो में जो ओलंपिक खेला गया था उसमें करीब 10 मिलियन टूरिस्ट आये थे और इन सभी के लिए जिस तरह के वर्ल्ड वलास होटल चाहिए होते है वैसे होटल इंडिया के किसी एक शहर में नही है।

ओलंपिक विलेज किसी भी सिटी के मुख्य एरिया के पास ही बनाया जाता है या उस सिटी के बहुत करीब, यानि की कोई भी ओलंपिक विलेज सिटी के ज्यादा दूर नही बनाया जा सकता है, क्योंकि ओलंपिक विलेज की सिटी से कनेक्टिविटी होना बहुत जरुरी होता है, एयरपोर्ट, ट्रेन्स, मेट्रो ये सब पास में ही होने चाहिए। एक महीने में अगर 10 मिलियन लोग किसी एक सिटी में आ जाये तो आप अंदाज़ा लगा सकते है कि कितनी दिक्कत आ सकती है और दिल्ली जैसी जगह पर तो पहले से ही इतना जाम होता है।इसके बाद सभी चीज़े मॉर्डन होनी चाहिए जैसी की स्टेडियम, हॉल और स्पोर्ट्स फैसिलिटी (facility) यह सब मॉर्डन होना चाहिए और इन सबकी कैपिसिटी बहुत ज्यादा (Huge) होनी चाहिए। लेकिन इतने कैपिसिटी के स्टेडियम बहुत ही कम यानि की 1-2 ही होते है, लेकिन इतने कैपिसिटी के स्टेडियम बहुत सारे चाहिये होते है। चौबीस घंटे बिजली, पानी और फ़ास्ट इंटरनेट होना चाहिए, इंडिया में इन्टरनेट की स्पीड कैसी है ये हम सभी जानते है। आप कही भी चले जाये इन्टरनेट की स्पीड ड्राप होती ही है। 4G के नाम पर पता नही क्या मिलता है।

इसके अलावा इतने बड़े इवेंट को कण्ट्रोल करने और सभी की सुरक्षा के लिए एक्स्ट्रा 50 – 60 हज़ार पुलिस वालों की जरूरत पड़ेगी और जो अभी देना बहुत मुश्किल है। दिल्ली, मुम्बई जैसे बड़े शहरों में अगर ओलंपिक होता है तो इन शहरों की जनसँख्या पहले से ही बहुत ज्यादा है ऊपर से 10 मिलियन से ज्यादा लोग आएंगे तो ये सब एक दम से कंट्रोल नही हो पायेगा। एक चीज़ और है भारत के अधिकतर लोग ओलंपिक देखने नही जायेंगे क्योंकि लोगो को पसंद है सिनेमा हॉल जाना, मॉल में घूमना या फिर कही और घूमने जाना। स्विमिंग या टेबल टेनिस इस तरह के स्पोर्ट्स देखने कोई नही जायेगा, और अगर जायेंगे भी तो बहुत ही कम लोग। तो माइंडसेट भी एक चीज़ है। आपको शायद याद हो कुछ सालों पहले भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित किये गए थे। इनमे फिक्सिंग हुई और कितना बड़ा घोटाला हुआ था। जिससे पूरी दुनिया के सामने भारत की किरकिरी हुई थी। तो कहा जा सकता है कि भारत अभी ओलंपिक कराने के लिये तैयार नही है। लेकिन आने वाले समय में भारत में ओलंपिक हो सकता है। ओलंपिक में क्रिकेट क्यों नही है? क्रिकेट के दीवानों में मन मे एक सवाल हमेशा आता रहता है कि ओलिपिंक गेम्स में क्रिकेट शामिल क्यों नहीं है, क्योंकि अगर क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल कर लिया जाए तो ओलिंपिक गेम्स की लोकप्रियता कई गुना बढ़ जाएगी खासकर भारत मे।

क्रिकेट ओलिंपिक में क्यों नहीं है, ये जानने से पहले आपको शायद ये जानकर हैरानी हो कि ओलंपिक में क्रिकेट एक बार खेला जा चुका है। जी हां अपने सही सुना ओलंपिक में क्रिकेट खेला जा चुका है। जानकारी के लिये बता दे कि यह मैच सन् 1900 के ओलिंपिक में खेला गया था जो ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस के बीच हुआ था और इसमें ब्रिटेन ने जीत दर्ज की थी। ◆ क्रिकेट पॉपुलर है, लेकिन जीतना फुटबॉल है उतना पॉपुलर नही है। इसके अलावा अमेरिका, चीन और अन्य यूरोपीय नेशन्स ऐसे हैं जो क्रिकेट नहीं खेलते है। ◆ ओलंपिक में क्रिकेट न होने का एक बड़ा कारण ये है कि क्रिकेट मैच के लिए कई चीजों की जरूरत होती है। साथ ही मैचों के लिए पिच तैयार करना बड़ी चुनौती होती है। जबकि दूसरे खेलों में ऐसी जरूरत नहीं पड़ती है। कई खेलों में एक बार ट्रैक बना दिया जाए तो वो पूरे ओलिंपिक चलता है। ◆ ओलिंपिक में ढेर सारे गेम्स खेले जाते हैं। लेकिन क्रिकेट के लिए ऐसे स्टेडियम की जरूरत होती है जहां कोई दूसरा खेल नही खेला जाना चाहिए। अब क्योंकि ओलंपिक में दुनियाभर के खेल खेले जाते है तो ऐसा पॉसिबल नही है। ◆ इसका एक और बड़ा कारण है समय। क्रिकेट में काफी समय लगता है और एक T20 मैच में भी 3.30 से 4 घंटे लग जाते है। साथ ही BCCI (Board of Control for Cricket in India) ने अभी अब तक इसमें अपनी कोई खास रुचि नही दिखाई है, यानि की बीसीसीआई ने क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल करने के कोई प्रयास ही नहीं किए हैं। क्रिकेट ओलंपिक का हिस्सा बनेगा या नहीं यह तो आपको आने वाले समय में ही पता चलेगा। तो अब आपको समझ आ गया होगा की भारत में ओलंपिक क्यों नही होते है और क्रिकेट जैसा लोकप्रिय खेल ओलंपिक का हिस्सा क्यों नही है। तो आशा करते है आपको यह जानकारी पसंद आयी होगी। इस अर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर करे, धन्यवाद