भारत के पहले व्यक्ति “Parag Agrawal” बने Twitter के नए CEO, जानिये इनसे जुड़ी कुछ खास बाते…


हाल ही में एक खबर ने पूरे भारत को गर्व से सीना चौड़ा कर दिया है,दरअसल ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने इस्तीफा दे दिया है और अब उनकी जगह कंपनी के सीईओ के रूप में भारत मूल के वासी पराग अग्रवाल को कंपनी की कमान दे दी गई है. इस बात की जानकारी उन्होंने खुद ट्वीट कर के दी है। जिसकी वजह से अब वह चर्चाओं में आगये है। आइए जानते हैं कि आईआईटी से पढ़े पराग अग्रवाल की आख‍िर ऐसी कौन सी ऐसी खूबी है जिसकी वजह से उन्हें ये कमान दी गयी।

गौरतलब है कि पराग अग्रवाल ट्विटर में सीटीओ यानी चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर के पद पर नियुक्त हैं। उनके पहले इस पद पर एडम मेसिंगर नियुक्त थे। एडम ने दिसंबर 2016 में कंपनी छोड़ दी थी। उनके बाद अंदरखाने तो पराग अग्रवाल को अक्टूबर 2017 में ही ट्विटर का सीटीओ बना दिया गया था, लेकिन आधिकारिक रूप से उन्हें सीटीओ पद पर नियुक्त करने की घोषणा 8 मार्च 2018 में हुई।ट्विटर के होने वाले इंडीपेन्डेंट बोर्ड चेयरमैन Bret Taylor ने कहा कि, ‘पराग ट्विटर को समझते हैं और कंपनी की विश‍िष्ट संभावनाओं की कद्र करते हैं. हमारी सबसे अहम प्राथमिकताओं को निभाने में उनकी भूमिका अहम रही है और मैं यह जानता हूं कि वह क्रियान्यवन को मजबूत करने और नतीजे देने में कमाल करेंगे. बोर्ड को पराग में काफी भरोसा है.’

जैक डोर्सी ने ट्वीट के जरिए इस्तीफा देने की बात बताई और अपने ट्वीट में ही बताया कि पराग अग्रवाल अगले सीईओ होंगे। उन्होंने अपने ट्वीट में अटैच किए लेटर में पराग अग्रवाल की काफी तारीफ भी की थी। उनके इंजीनियरिंग वर्क की वजह से कंपनी को साल 2016-17 में अपने ऑडिएंस ग्रोथ को बढ़ाने में मदद मिली थी. जैक डोर्सी कहते हैं कि पिछले 10 सालों में पराग अग्रवाल का काफी बहुत ही शानदार रहा है। जैक डोर्सी के इस्तीफा देने के बाद पराग अग्रवाल ने भी एक ट्वीट किया।

पराग अग्रवाल ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई IIT Bombay से की. इसके बाद उन्होंने डॉक्टरेट Stanford University से किया. उनकी स्कूलिंग Atomic Energy Central School से हुई है. उनकी पत्नी विनीता अग्रवाल है l वह एक वेंचर कैपिटलिस्ट और फिजिश‍ियन हैं. उनका एक तीन साल का बेटा है. दरअसल जैक डोर्सी को ट्विटर के सीईओ पद से इसलिए इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि वह एक वित्तीय भुगतान कंपनी स्क्वायर के भी सीईओ हैं। स्क्वायर की स्थापना उन्होंने ही की है। ऐसे में कुछ बड़े निवेशकों ने जैक डोर्सी के एक साथ दो कंपनी के सीईओ होने पर सवाल उठाए थे। जिसकी वजह से उन्हें कदम उठाना पड़ा।