जानिए आखिर कौन है गुलशन यादव, जिनकी वजह से टूटा राजा भैया का 29 साल का सियासती रिकॉर्ड।


जानिए आखिर कौन है गुलशन यादव जिनकी वजह से टूटा राजा भैया का 29 साल का सियासती रिकॉर्ड।प्रतापगढ़ में सियासती खेल तब गरमाया जब पिछले तीन दशक से इस राज्य में राज करने वाले रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का पत्ता इस बार साफ़ हो गया जी हाँ आपको बता दे राजा भैया ने पिछले तीन दशक प्रतापगढ़ को अपने हिसाब से ही चलाया है, लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में राजा भैया ने अपने पुराने साथी और सपा प्रत्याशी गुलशन यादव को 30,418 वोटों से पराजित किया है। इससे साफ़ होता है की इस बार उनकी सियासी बादशाहत कम हो गई है, क्यूंकि एक प्रचार में उन्होंने कहा था की वह कुल  डेढ़ लाख वोटों से जीतेंगे लेकिन ऐसानहीं हुआ। आइये जानिए क्या है पूरा मामला।

दरअसल पहले तो आपको बता दे आखिर कौन है गुलशन यादव। जानकारी के मुताबिक गुलशन यादव का जन्म प्रतापगढ़ जिले के कुंडा के मऊदारा गांव में हुआ है। गुलशन के पिता का नाम सुंदर लाल यादव है और वो तीन भाई है। गुलशन का छोटा भाई छविनाथ यादव समाजवादी पार्टी के प्रतापगढ का जिला अध्यक्ष हैं। गुलशन यादव ने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत राजा भैया के सानिध्य में रहकर की थी। करीबी दो दशक पहले मायावती सरकार में राजा भैया पर पोटा लगा था, जिसके गवाह राजेंद्र यादव थे। राजेंद्र को मार दिया गया, जिसके बाद गुलशन यादव चर्चाओं में आए थे और जेल गए थे। बता दें, गुलशन यादव को एक वक्त राजा भैया के बेहद करीबियों में गिना जाता था।

साल 1993 में  रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने प्रतापगढ़ जिले पर अपना कब्ज़ा करना शुरू कर दिया यानि वह तब से ही लगातार  निर्दलीय विधायक चुने जाते आ रहे हैं और सपा-बीजेपी के सहयोग से मंत्री भी बनते रहे। ऐसे में समाजवादी पार्टी ने पिछले ढाई दशक से कुंडा में राजा भैया के खिलाफ अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा। वो राजा भैया का समर्थन करती रही। लेकिन, इस बार सपा ने उनके खिलाफ अपना प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतार दिया है, जिससे राजा भैया के समक्ष चुनौती खड़ी हो गई थी। तो वहीं, कुंडा सीट से प्रत्याशी उतारने को लेकर चुनाव प्रचार के दौरान राजा भैया और अखिलेश यादव के बीच काफी तल्खियां भी देखने को मिली थीं।

हालाँकि 10 मार्च की सुबह 8 बजे जब मतगणना शुरू हुई तो साफ़ पता चल गया की इस बार भी  राजा भैया को ही बढ़त हासिल की है लेकिनजैस-जैस राउंड बढ़ते गए हार-जीत में वोटों का अंतर भी कम होता चल गया। 30वें राउंड में राजा भैया ने गुलशन यादव को 30,418 वोटों से पारजित कर दिया। राजा भैया को 99,261 वोट मिले। यानि कुल वोटों का 50.58 फीसदी मत मिला है। इसके मुकाबले सपा उम्मीदवार गुलशन यादव 69,297 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। बीजेपी उम्मीदवार सिंधुजा मिश्रा सेनानी 16,347 वोटों के साथ तीसरे और बसपा उम्मीदवार 3,321 वोट पाकर चौथे स्थान पर रहे हैं।

आइये अब आपको बताते है आखिर क्या है जमानत का जब्त होना। अगर हम यहाँ चुनाव आयोग की बात करे तो जब कोई उम्मीदवार सीट पर पड़े कुल वोटों का 1/6 यानी 16.66% वोट हासिल नहीं कर पाता तो उसकी जमानत जब्त कर ली जाती है। जमानत जब्त होने पर उम्मीदवार की जमानत राशि को चुनाव आयोग रख लेता है, जिसे जमानत जब्त होना कहा जाता है। विधानसभा चुनाव में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार के लिए जमानत राशि की रकम 10 हजार रुपये होती है, जबकि एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को 5 हजार रुपये जमा कराने होते है।