माँ का मंगलसूत्र बेचकर चालान भरने गया था युवक, सच्चाई सुन भर आई सबकी आँखे, बदल गया ARTO दफ्तर का नजारा


ग़रीबी भी लोगों को क्या-क्या नहीं दिखाती। उत्तर प्रदेश के जिले महराजगंज से कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसे सुन कर आपकी भी आँखों में आंसू आ जाएँगे। एक युवक RTO कार्यालय में चालान भरने आया, वह चालान की रक़म उसके पिता ने अपनी पत्नी का मंगलसूत्र बेचकर जुटाई थी। 

मंगलसूत्र बेचकर युवक भरने गया चालान 

सिंहपुर ताल्ही गांव का रहने वाला विजय नामक युवक RTO में टेम्पो का चालान भरने गया था। चालान की रक़म देते हुए वह रोने लगा, जिसे देखकर RTO ने उसे कुर्सी पर बिठाकर पहले पानी पिलाया और पूछा कि वह रों क्यों रहा है, जिसपर युवक ने RTO को बताया कि उसके पिता टेम्पो चलाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। आठ जून को आप द्वारा गाड़ी का चालान कर दिया गया था। गाड़ी को सीजकर पुरंदरपुर थाने में भेज दिया गया है। इसमें 24,500 रुपये का चालान काटा गया है। पूरा पैसा नहीं हो पाया है। पिता ने मां का मंगलसूत्र बेचकर किसी तरह से 13000 रुपये जुटाए हैं। इसे जमा कर लीजिए। बाकी रकम के लिए कुछ जमीन है, बेचने के लिए ग्राहक ढूंढ रहे हैं। जमीन बिक जाएगी तो बाकी रकम को भी जमा कर देंगे।

RTO ने की ज़िम्मेदारी उठाने की बात

युवक की बातें सुनकर सभी कर्मचारी भावुक हो गए। जिसके बाद RTO ने युवक से कहा, जो पैसे लाए हो उसे लेकर जाओ व मंगलसूत्र छुड़ा कर मां को दे देना। पिता को बताना कि वह खेत न बेचें। उन्होंने अपने पास से 17 हजार रुपये युवक को दिया। कहा कि तुम पढ़ाई करो।उन्होंने विजय का मोबाइल नंबर लिया और साथ ही उसे खुद का नंबर भी दिया और कहा कि अगर और जरूरत पड़े तो बताना। जब बहनों की शादी करना तो बताना। RTO ने युवक की गाड़ी के चालान की रकम को खुद जमा किया। साथ ही गाड़ी का इंश्योरेंस भी कराया।

हम सबको सभी की मजबूरी समझनी चाहिए

महराजगंज के RTO आरसी भारतीय कहते है कि हम सभी को एक-दूसरे की मजबूरी का समझना चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि नियम कानून से हटकर काम किया जाए। जो युवक कार्यालय में आया था उसकी गाड़ी का नियम और कानून के तहत चालान किया गया था। उस समय हमने अपने विभागीय दायित्वों का निर्वहन किया था। नियम व कानून ने अपना काम किया था। किसी मां का मंगलसूत्र बिकना दुखदायी है। आपको बता दें कि RTO आरसी भारतीय के इस कदम की सभी सराहना कर रहे है।