सरकार की नयी पॉलिसी से 30 फीसदी तक सस्ती हो जाएंगी गाड़ियां, जाने पूरी जानकारी


सरकार बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वाहन कबाड़ नीति (व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी) इस महीने के आखिर तक लागू कर सकती है। हालांकि, ऐसी अटकलें लगाई जा रही थी लेकिन नई वाहन कबाड़ नीति में वाहन कंपनियों को टैक्स में कोई छूट नहीं मिलेगी। बल्कि कंपनियों को ही पुराने वाहन स्क्रैप कराने वालों को फायदा देना होगा। सरकार के एक उच्च अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि ऑटोमोबाइल कंपनियां पुराने वाहन स्क्रैप करा कर नए वाहन खरीदने वाले को प्रोत्साहन अपनी तरफ से दे सकती हैं। अधिकारी के अनुसार, 15 साल पुराने कमर्शियल गाड़ियों और 20 साल पुरानी निजी गाड़ियां वाहन कबाड़ नीति के तहत आएंगी। इसके साथ ही वाहनों को सड़क पर चलाने के लिए उनके फिटनेस सर्टिफिकेट को अनिवार्य किया जाएगा।

वाहनों को ऑटोमैटिक टेस्ट सेंटर से फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होगा। अगर कोई वाहन तीन बार फिटनेस सर्टिफिकेट लेने में असफल रहेगा तो उसे स्क्रैप कराना अनिवार्य होगा। इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्यों से वाहन स्क्रैप कराने वालों को रोड टैक्स में छूट देने की अपील की थी। बता दें कि पिछले महीने अगस्त में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नई वाहन कबाड़ नीति लागू होने पर ऑटोमोबाइल कंपनियों को लाभ होगा। वाहनों की मांग बढ़ने से उत्पादन बढ़ेगा जिससे अर्थव्यवस्था में चुस्ती आएगी।

वाहन कंपनी को क्या लाभ होगा:

वाहन कबाड़ नीति के लागू होने से 3 करोड़ पुराने वाहन सड़क से हटेंगें
पुराने वाहन हटने और नए वाहन की मांग बढ़ेगी, जिससे बिक्री बढ़ेगी
वाहनों की बिक्री बढ़ने से ऑटो उद्योग रफ्तार पकड़ेगी
वाहन में स्टील का हिस्सा 50 से 55 फीसदी होता है। वाहनों के स्क्रेप से करीब 6550 करोड़ रुपये का स्टील स्क्रैप मिल जाएगा।

ग्राहकों का भी होगा लाभ:

लोगों को अपनी पुरानी गाड़ी स्क्रैप कराने पर सरकार की ओर से एक सर्टिफिकेट मिलेगा
इस सर्टिफिकेट को दिखाने पर नई कार खरीदने वालों को ऑटो निर्माता और सरकार की ओर से कई तरह की रियायत मिलेगी
नितिन गडकरी ने कहा था कि नई वाहन कबाड़ नीति लागू होने पर वाहनों की कीमतों में 20 से 30 फीसदी की कमी आएगी
वायु प्रदूषण में 25 फीसदी की कमी आएगी जो पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए बढ़िया साबित होगा।

कैबिनेट नोट हुआ तैयार:

सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री वीके सिंह ने हाल ही में राज्यसभा को सूचित किया था कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पुराने वाहनों के निपटारे के लिए एक मंत्रिमंडलीय परिपत्र (कैबिनेट नोट) तैयार किया गया है। वहीं, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि एक बार नीति को मंजूरी मिलने के बाद, भारत ऑटोमोबाइल विनिर्माण का एक केंद्र बन सकता है। क्योंकि स्टील, एल्यूमीनियम और प्लास्टिक के स्क्रैप से उपलब्ध होने वाला प्रमुख कच्चा माल को रीसाइकिल (पुनर्नवीनीकरण) किया जा सकेगा, जिससे ऑटोमोबाइल की कीमतें 20 से 30 फीसदी कम हो जाएंगी।

मोटर वाहन नियम में संशोधन:

सरकार ने 26 जुलाई, 2019 को इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए 15 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों को नष्ट करने के लिए मोटर वाहन नियमों में संशोधन का प्रस्ताव किया था। एक मसौदा अधिसूचना में, सरकार ने एक वर्ष की वर्तमान समय-सीमा के बजाय हर छह महीने में 15 साल से अधिक पुराने वाहनों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट के रिन्यू करने का प्रस्ताव किया है।

ग्राहक को कैसे मिलेगी रियायत:

यह साफ नहींवाहन कबाड़ नीति लागू होने के बाद मिलने वाली रियायत का मामला केंद्र सरकार, राज्यों और कंपनियों के बीच फंसता नजर आ रहा है। कोरोना संकट के कारण राज्य और वाहन कंपनियां नकदी संकट से जूझ रही हैं। वहीं, बीते हफ्ते सरकार ने गाड़ियों पर जीएसटी कटौती से मना किया था। ऐसे में स्क्रैप पॉलिसी लागू होने के बाद पुराने खरीदार को किस तरह राहत मिलेगी यह तस्वीर साफ होती दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में इस पॉलिसी को तुरंत लागू करना मुश्किल होगा। अगर, सरकार गाड़ियों को स्क्रैप कराने पर कोई प्रोत्साहन नहीं देगी तो यह कानून लागू होने के बाद भी इसमें तेजी नहीं आ पाएगी।

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