पहले फेसबुक पर चलाया प्यार का चक्कर, फिर हुई महिला कांस्टेबल के साथ ये वारदात


हमारे देश में कई मामले ऐसे सामने आते रहते है जिनकी वजह से गलत कामो पर से पर्दा फाश होजाता है। अब एक मामला लखनऊ से सामने आया जहाँ पुलिस ने डीजीपी मुख्यालय में तैनात महिला कांस्टेबल की हत** में शामिल प्रतापगढ़ के तहसीलदार, उसकी पत्नी और दोस्त को गिरफ्तार कर हत्** से पर्दा उठा दिया, लेकिन महिला सिपाही की हत्या उलझे रिश्तों और सा-जि-श का नतीजा थी. साजिश में भले ही जान महिला सिपाही ने गंवाई हो लेकिन शि-का-र इस जुल** में शामिल आरोपी भी थे.वह इस केस में सबसे बड़े मास्टरमाइंड रहे थे इसलिए पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है।

जैसे ही पुलिस ने इस मामले की छानबीन शुरू की तो इसमें जांच में मिले सुबूत और असंद्रा थाने में तैनाती के दौरान सामने आई जानकारियां इस ओर इशारा कर रही थी कि रुचि भले ही सिपाही थी लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे. पुलिस की नौकरी में आने के बाद रुचि ने अपने साथी सिपाही से शादी की, लेकिन बाराबंकी में तैनाती के दौरान फेसबुक के जरिए तहसीलदार पद्मेश से परिचय हुआ.जिसके बाद उनकी तलाश जारी कर दी गयी। फिर अपने एक करीबी के प्रतापगढ़ में जमीनी खेल में ली गई पद्मेश श्रीवास्तव से मदद के बाद दोनों के बीच मुलाकात का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ कि रुचि चौहान ने अपने सिपाही पति को छोड़कर तहसीलदार को अपना पति बनाने का सपना संजो लिया और इस सपने को पूरा करने के लिए उसने सिपाही पति से छुटकारा पाने के लिए त!क तक फाइल कर दिया.

इस महीने कोर्ट में दोनों के अलग होने का मुक-द-मे का फैसला होने ही वाला था कि शादीशुदा तहसीलदार को अपना पति बनाने के लिए रुचि ने दबाव बनाना शुरू कर दिया था. फेसबुक के जरिए अपने से कम उम्र की लड़की से दोस्ती में पद्मेश भी ऐसे डूबे कि पत्नी प्रगति को इलाहाबाद में छोड़कर रुचि से मिलने लखनऊ आने लगे.चर्चा है कि रुचि की डीजीपी मुख्यालय में संबद्धता भी पद्मेश ने ही करवाई थी. लखनऊ में तबादले के बाद रुचि किराए के सुलभ अपार्टमेंट में रहती थी. कहा जाता है कि यह अपार्टमेंट भी तहसीलदार ने ही दिलवाया था. अभी इस अपार्टमेंट के असल मालिक की तलाश बाकी है. इस काम में पति-पत्नी के अलावा तीसरा व्यक्ति नामवर सिंह भी साजिश में शामिल था, लेकिन सा-जि!श का शि!र भी था.

जैसे ही रूचि ने शादी का दबाव डालना शुरू कर दिया तो परेशान पद्मेश और उसकी पत्नी प्रगति ने उसको रास्ते से हटाने का जो प्लान रचा उसमें नामवर सिंह एक मोहरे की तरह था. दरअसल प्लानिंग थी कि रुचि को मुलाकात के लिए पद्मेश कॉल कर बुलाएंगे जरूर, लेकिन *शे की हालत में उसकी हत! और लाश को फेंकने का काम नामवर करेगा.ऐसे में अगर हत्** के मामले में कोई पकड़ा भी जाएगा तो वह नामवर होगा. 12 फरवरी की शाम पद्मेश ने रुचि को फोन कर मुलाकात के लिए पीजीआई इलाके में बुलाया. जिस गाड़ी में रुचि और पद्मेश बैठे थे, वह नामवर की थी.

दरअसल जब रुचि बेहोश हो गई तो लोगो के बाद नामवर अपनी कार से रुचि की लाश नाले में फेंक आया, लेकिन नामवर की एक चूक ने इस काम  में तहसीलदार की पत्नी प्रगति श्रीवास्तव को भी आ!पी बना लिया. नामवर ने घटनास्थल से जब रुचि का फोन स्विच ऑफ किया तो वहीं से प्रगति को फोन कर बताया काम हो गया है. पु लिस की जांच में अंतिम बार रुचि की तहसीलदार से की गई बात और फिर जिस जगह और जिस वक्त पर रुचि का मोबाइल बंद हुआ, ठीक वहीं से तहसीलदार की पत्नी के नंबर पर एक कॉल ने इस पूरी साजिश की तीनों कड़ियों को जोड़ दिया और तीनों आ**पी पुलिस के शि-कं-जे में फंस गए.और पुलिस ने कुछ यूँ केस को निपटा दिया।