गुजरात का ये परिवार रोजाना 25 किलो रोटी बनाकर भरता है 300 से ज्यादा बेसहारा कुत्तों का पेट,लोग दे रहे है खूब दुआएं


हमारे देश जहाँ बढ़ता अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहा वही कई लोग ऐसे भी है जो ईमानदारी की दात देते है। जी हाँ हमारे भारत जैसे बड़े देश में जितनी आबादी है उतने ही तरीके के लोग यहाँ बस्ते है। कई लोग सिर्फ अपने बारे में सोचते है और कई दूसरे के बारे में भी। लेकिन जो दुसरो के बारे में सोचते है वैसे लोग बेहद कम मिलेंगे आज हम आपको एक ऐसे ही परिवार से रूबरू कराने जा रहे है जो खुद के साथ-साथ कई पशु-पक्षी का पेट भी भरते है जी हाँ आइये जानिए इनकी प्रेरणा देने वाली कहानी।

जैसे की आप सभी जानते है की भगवान भैरव की सवारी एक कुत्ता ही था.अतः कुत्ते को प्रसन्न कर आप भगवान भैरव को भी प्रसन्न कर सकते हैं. यदि आपके घर के आसपास कोई कुत्ता रहता है या वह घूमता हुआ आपके दरवाजे पर आ जाता है तो उसे कभी भी खाली पेट न जाने दें.कुत्ते को सिर्फ रोटी खिलाने से आपकी कई तरह की समस्याएं दूर हो सकती हैं.घर में जब खाना बने तो पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए रख लेनी चाहिए. कुत्ते को रोटी खिलाकर शत्रुभय दूर होता है.यदि आपका शनि ग्रह नाराज है या राहु-केतु दिक्कतें कर रहे हैं तो रात के समय बनने वाली आखिरी रोटी पर सरसों का तेल लगाकर काले कुत्ते को खिला दें.

जानकरी के मुताबिक एक परिवार है जो चारण परिवार नाम से मशहूर है। ये परिवार बेहद पुण्य का काम कर रहा है जो सभी लोगो के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। दरअसल ये परिवार रोजाना तक़रीबन 250 रोटियां और गेहूं के आटे का छह किलो गीला हलवा बनता है.जिसे बनाने के लिए परिवार के सभी सदस्य अपना योगदान देते है,इतना ही नहीं इसके लिए एक महिला सहायक को भी काम पर रखा है जिससे काम जल्दी निपटाया जा सकेचारण परिवार को जीव-जंतुओं से विशेष प्रेम है, इसीलिए  25 किलो आटे का उपयोग कर लगभग 250-300 रोटियां तैयार कर भूखे कुत्ते व अन्य जानवरो को खिलाते है.इन सभी कामों के लिए चारण परिवार ख़ुशी-ख़ुशी 3० से 35 हज़ार का खर्च हर महीने करता है.

जशराज नाम के इस शख्स ने एक दिन देखा कि कुत्ते के छोटे-छोटे बच्चे, अपनी माँ के साथ बड़ी ही दयनीय हालत में थे.बस यही से यशराज की जिंदगी ने एक नया मोड़ ले लिया.अगले दिन उन्होंने अपनी पत्नी से तीन-चार रोटियां बना कर देने को कहा.इस तरह वह उनको रोज रोटियां देने लगें.धीरे-धीरे कुत्तों की संख्या बढ़ी, पहले चार फिर 10 और आज ये सिलसिला बढ़ते-बढ़ते 250 रोटियों तक पहुंच गया है.रोटियों के साथ ही कुत्तों के लिए आटे का गीला हलवा भी बनता है.सुबह बेटा बेटा कुत्तों को रोटियां खिलाता है, तो शाम के बक्त उनकी बेटी और पत्नी, उन्हें हलवा खिलाते हैं.

मिली जानकारी के अनुसार जशराज चारण ने 37 साल तक फॉरेस्ट गार्ड और फिर फॉरेस्टर यानी वनपाल के तौर पर बन बिभाग की सेवा की है.इतना ही नहीं यशराज चारण के चाचा भी वन विभाग में ही काम करते थे.और अब उनने परिवार की नई पीढ़ी में एक बेटी और छोटा बेटा भी वन विभाग में ही काम कर रहे हैं.हालाँकि जशराज अब रिटायर हो चुके है लेकिन जानवरो के प्रति उनका प्यार अभी भी वैसा ही है।