मरते दम तक मनुष्य का पीछा नहीं छोड़ती है ये चीजे, आज ही जान ले


इस पृथ्वी पर जब कोई भी जन्म लेता है तो उसकी म’रना निश्चित है अपने जीवन काल में उस व्यक्ति ने अच्छे बुरे जो भी कर्म किए होते है वो उसके साथ ही जाते है ! हमारे शरीर त्यागने के बाद, हमारे साथ कर्म तो जायेंगे ही लेकिन कर्म के साथ और क्या क्या जाता है इसके बारे में गरुड़ पुराण में विस्तार से बताया गया है और आज हम भी आपको इससे संबंधित जानकारी देने वाले है.

गरुड़ पुराण के अनुसार जब किसी इंसान की मृ ‘त्यु होती है तो उसके शव का अंतिम संस्कार करने के बाद से उसकी आत्मा का नया सफर आरंभ हो जाता है जो उसे यमलोक लेकर जाता है इस सफर के दौरान उस आत्मा के साथ कर्म के अलावा और चार चीजें भी साथ जाती है इसका अर्थ यह हुआ मृत्य के बाद आत्मा के साथ एक नही बल्कि पांच चीजे साथ जाती है मृत्यु के बाद उस आत्मा का नया जन्म होने पर और सही समय आने पर ये पांचों चीजे उस नए शरीर में चली जाती है आखिर वो पांच चीजे कौन सी है.

गरुड़ पुराण में कामना के बारे में विस्तार से बताया गया है कामना इंसान और अन्य जीवों की मदद करती है ताकि वे नए जीवन में नए शरीर को आसानी से धारण कर पाए और मृत्यु के समय यदि किसी की कोई कामना पूरी नहीं हो पाती तो वो अधूरी कामना उस के साथ ही चली जाती है इसलिए अपने पहले जन्म की अधूरी इच्छाओं को पूरी करने के लिए उस आत्मा को नए शरीर के साथ जन्म लेना पड़ता है ताकि वे अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी कर सके इसलिए कहा जाता है मृत्यु के समय किसी भी चीज में मोह नही रखना चाहिए अपनी सभी इच्छाओं को भूल जाना चाहिए और भगवान को याद करना चाहिए.

अपने जीवन काल में यदि कोई भी इंसान किसी से कर्ज लेता है तो उसे समय पर वापिस कर देना चाहिए गरुड़ पुराण के अनुसार जन्मों तक कर्ज से पीछा छुड़ाना मुश्किल है क्योंकि जब मृत्यु के बाद कर्ज देने वाला परलोक में आता है और तो कर्ज लेने वाले से अपना कर्ज वापिस मांगता है तो ऐसे में यमदूत कर्ज चुकाने के लिए कर्जदार के शरीर का मांस काट कर कर्ज देने वाले को देते है लेकिन इतने से ही कर्जदार का कर्ज माफ नही होता उसके लिए कर्जदार को फिर से जन्म लेना पड़ता है और कर्ज वापिस करना पड़ता है आपको अपने नए जन्म में कोई समस्या न हो तो इसके लिए यदि आपने किसी से कर्ज लिया हो तो मृत्यु से पहले वापिस करदे.

वासना ऐसी चीज है जिसका कोई अंत नही है आम इंसान की परिभाषा में वासना का अर्थ शारीरिक कामनाओं का पूरा करना है लेकिन इसका सही अर्थ संसार के सुख की चाह होना है जब मृत्यु के समय किसी इंसान का मोह अपने पति या पत्नी ,बच्चो और अपने परिवार और उनके सुख दुख में हो और इसी मोह में उसकी मृत्यु हो जाए तो मरण सेज पर भी उसकी आत्मा वासना मुक्त नही हो पाती इस से संबंधित एक कहानी भी बताई जाती है एक राजा था जिसका नाम भारत था उसका मोह हिरण के एक प्यारे से बच्चे में था उस हिरण के बच्चे के बारे में सोचते सोचते राजा भारत की मृत्यु हो गई हिरण के बच्चे में मोह होने की वजह से अगले जन्म में राजा भारत ने एक हिरण के रूप में जन्म लिया इसलिए कहा जाता है मृत्यु के समय कामना और वासना का त्याग कर देना चाहिए यदि उस समय आपके मन में कोई कामना रह जाती है तो उसी योनि में आपका नया जन्म होता है.

गरुड़ पुराण में बताया गया है अपने। जीवन काल में किया गया दान का पुण्य जन्मों तक साथ रहता है हमारे द्वारा किए गए दान का पुण्य का फल कभी न कभी जरूर मिलता यदि कभी अनजान आपकी मदद करे। तो समझ जाए ये आपके पुण्य का फल है पुण्य की तुलना बैंक में रखे धन से की गई है जो जरूरत पड़ने पर काम आता है इसलिए इंसान को अपने जीवन काल में दान करके पुण्य कमाते रहना चाहिए कुछ खास दिन है जिनमे किए गए दान से बहुत पुण्य मिलता है

हर इंसान अपने जीवन काल में जन्म से मृत्यु तक अच्छा या बुरा कर्म करता है जो मृत्यु के बाद भी उसके साथ जाते है कर्म के बारे में गीता में विस्तार से बताया गया है आत्मा मृत्यु के पश्चात शरीर के द्वारा किए गए अच्छे या बुरे कर्मो को इक्कठा कर लेती है इन कर्मो के आधार पर ही परलोक में सुख या दुख मिलता है और पुन:जन्म में भी इसी के आधार पर फल मिलता है श्री कृष्ण ने कहा है कि सात जन्म तक कर्म आपके साथ रहते है और अपने कर्मो का फल आपको भोगना पड़ता है.

महाभारत में इसका बहुत बड़ा उदाहरण बताया गया है महाभारत के युद्ध में जब भीष्म पितामह की मृत्यु हुई और वो बाणों की शईया पर लेटे हुए थे तो उन्होंने श्री कृष्ण से पूछा मेरी चल बसने  के पीछे क्या कारण है तो श्री कृष्ण ने बताया एक सौ एक साल पहले आपकी वजह से एक जीव की मृत्यु इसी प्रकार हुई थी ये आपके कर्मो का फल है इसलिए आज आपकी मृ-त्यु इस तरह हुई है इसलिए इंसान को जीवन में अच्छे कर्म करने चाहिए ताकि उसे नए जन्म में कोई कष्ट न हो.