ढाई घंटे देर से पहुंची ट्रेन तो यात्रियों ने लिया रेलवे से हर्जाना, IRCTC ने दिए 250-250 रुपए


देश की पहली कॉरपोरेट ट्रेन तेजस दो साल में पहली बार लेट हो गई। 21 अगस्त को लखनऊ जंक्शन से ट्रेन सही वक्त पर निकली, लेकिन दिल्ली पहुंचते-पहुंचते ढाई घंटे लेट हो गई। इसकी वजह दिल्ली में बारिश के कारण सिग्नल फेल होना और यार्ड में पानी भरना बताया जा रहा है।नियम के मुताबिक, इस ट्रेन के लेट होने पर यात्रियों को रिफंड मिलता है। इसीलिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म (IRCTC) ने रिफंड के लिए क्लेम करने वाले 1,574 पैसेंजर्स को मंगलवार को 3,93,500 रुपए का भुगतान किया है।

देश में दो रूट पर चलती है तेजस
विमान जैसी सुविधाओं से लैस तेजस एक्सप्रेस अगस्त 2019 में शुरू हुई थी। यह ट्रेन कोरोना की दूसरी लहर में 4 अप्रैल को बंद कर दी गई थी। इसके बाद 7 अगस्त से दोबारा शुरू की गई। यह ट्रेन लखनऊ-नई दिल्ली और अहमदाबाद-मुंबई रूट पर चलती है।

तेजस देश की पहली ट्रेन है, जिसके लेट होने पर यात्रियों को रिफंड दिया जाता है। IRCTC का नियम है कि यदि ट्रेन दो घंटे से ज्यादा लेट होती है तो हर पैसेंजर को 250 रुपए रिफंड दिए जाएंगे। एक घंटे तक ट्रेन लेट होने पर 100 रुपए रिफंड करने का नियम है। IRCTC ने इसी हिसाब से यात्रियों को 250-250 रुपए उनके बुकिंग अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया है।

ट्रेन लेट होते ही पैसेंजर को मिलता है मैसेज
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि तेजस में यात्रा करने वाले पैसेंजर्स को ट्रेन लेट होते ही एक मैसेज भेजा जाता है। इसमे एक मेल ID होती है, जिस पर यात्री रिफंड के लिए क्लेम कर सकते हैं।21 अगस्त को ट्रेन लेट होने पर कुल 1,574 यात्रियों ने क्लेम किया। इनका रिफंड उनके खातों में ट्रांसफर कर दिया गया है। उनका कहना है कि तेजस के संचालन में तकनीकी खराबी न आने पाए इसके लिए इसके ट्रैक पर हर वक्त मॉनिटरिंग की जाती है। इस सर्विलांस को और मजबूत किया जा रहा है।

बुकिंग के साथ बढ़ता है किराया
तेजस में फ्लेक्सी फेयर स्कीम लागू है, यानी सीटों की बुकिंग होने के साथ ही इसका किराया बढ़ता जाता है। दिल्ली तक चेयर कार का बेस प्राइस 1,125, एग्जीक्यूटिव क्लास का बेस प्राइस 1,280 रुपए और एग्जीक्यूटिव चेयर कार का 2,450 रुपए है।