10 रूपए की मसाला डिब्बी बेचने वाली महिला ने कर दिखाया ऐसा काम, आज पूरा देश कर रहा है सलाम


मेहनत और लगन किसी भी इंसान की व्यर्थ नहीं जाती बस इंसान को अपना लक्ष्य दृंढ रखना चाहिए फिर वह उपलब्धियां हासिल कर के ही रहेगा। वैसे तो इस देश में कई ऐसी कहानियां सुनने को व् देखने को मिल जाएंगी जहाँ ऐसी ही कुछ लगन और मेहनत से लोगो ने मुकाम हासिल किया हो उनमे से एक आज हम आपको सुनाने जा रहे है जहाँ एक सुषमा नाम की महिला ने अपनी मेहनत के दम पर कामयाबी हासिल की। वह बेहद संघर्षशील बचपन से बड़ी हुई जिसके बाद खुद के दम पर सब खड़ा कर दिया। आइये जानिए क्या है पूरा मामला।

कहते हैं न वक़्त की ठोकर भी उन्हें लगती है जो बेहद कुशल लोग होते है ठीक वैसे ही सुषमा पढ़ाई में काफी तेज थी वह दसवीं कक्षा तक प्रथम स्थान पर ही आयी थी लेकिन उनके पिता नहीं थे जिस कारण इस पढ़ाई का कोई फायदा नहीं हुआ बता दे सुषमा का न तो कोई भाई था बस बहन थी जिस कारण माँ ने सर से जल्दी बोझ हटाने के कारण दोनों बेटियों की जल्दी शादी करने का फैसला लिया क्यूंकि सुषमा की मां को रिश्तेदारों से ताने सुनने पड़ते थे कि जब बेटियों के पिता ही इस दुनिया में नहीं है तो इनको पढ़ा लिखा कर क्या करना है।

दरअसल जब सुषमा को पढ़ने की चाह हुई तो उस दौरान उनके पास शादी के प्रस्ताव आने लगे जिसे सुषमा ने ठुकरा दिया लेकिन काफी समय बाद जब सुषमा ने 12 वी पास की तो उन्हें एक बार फिर से शादी का प्रस्ताव आया फिर उस दौरान घरवालों के दबाव की वजह से सुषमा को शादी के लिए हाँ करना पड़ा। लेकिन यहां किस्मत ने सुषमा का साथ दिया और उसकी यहां शादी खुद ही टूट गई जिसके बाद सुषमा ने साइंस से 12वीं की कक्षा उत्तीर्ण की , सुषमा का सपना डॉक्टर बनने का था लेकिन रिश्तेदारों ने उसको ऐसे ताने देने शुरू कर दिए कि सपने अपनी औकात देखकर देखने चाहिए, क्योंकि सुषमा के शहर उम्ब्रज में कोई साइंस कॉलेज नहीं था इसके चलते सुषमा को घर से दूर कराड जाना पड़ा. घर के हालात खराब होने के कारण कोई भी रिश्तेदार कराड में सुषमा को अपने घर नहीं रखना चाहता था।

दरअसल काफी जतन करने के बाद सुषमा का आर्मी हॉस्टल में रियायती दर से दाखिला लिया. कॉलेज के शुरुआती दिनों में ही उसकी बहन ने कह दिया था कि कॉलेज पूरा होने के बाद आपकी शादी की व्यवस्था की जाएगी. हालांकि कॉलेज में कई लड़कों ने उस को प्रपोज किया लेकिन उसने सब का प्रपोजल ठुकरा दिया. लेकिन समाज में अपनी मां और बहन के दबाव के चलते आखिरकार उसने एक लड़के के साथ लव मैरिज की उसके बाद उन्होंने शादी के एक साल बाद बेटे को जन्म दिया फिर उस दौरान भी सुषमा ने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा और खूब मेहनत की।

शादी के बाद अपने 3 महीने के बच्चे को लेकर सुषमा ने अपने आगे का सफर तय किया ये बेहद संघर्षपूर्ण था लेकिन सुषमा ने फिर भी हार नहीं मानी और चल दी इन्हे पूरा करने के लिए। एक छोटी सी दुकान खोली जहाँ वह पूरा दिन अपने बच्चे के साथ रहती थी साथ में उनके पति छोटी-मोटी नौकरी करने लगे। गौरतलब है कि जिसके बाद सुषमा ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया और वह कपड़े सिलाई करने लगी लेकिन वह मुश्किल से ही 500 से 1000 रुपए कमा पाती थी. सभी के विरोध करने के बावजूद सुषमा ने एमबीए में एडमिशन लिया. एमबीए की पहली तब उसने पास कर ली लेकिन सेकंड टर्म के लिए उसके पास पैसे नहीं थे. इसके बाद उसने अपना मंगलसूत्र गिरवी रखा अपनी पढ़ाई को चालू रखा।

गौरतलब है पढ़ाई पूरी करने के बाद सुषमा की नौकरी लग गयी जिसकी सैलरी एक लाख प्रति माह थी लेकिन अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए सुषमा ने वह नौकरी छोड़ अपने पति के साथ पुणे आ गयी जिसके बाद वह सड़क पर ₹10 की डिब्बी मिसाला बेचना शुरू किया.गौरतलब है कि सड़क पर टेबल रख ₹10 की डब्बी मसाला बेचने में सुषमा को कभी शर्म नहीं आई. 10 लाखों रुपए के पैकेज वाली सुषमा अब ₹10 की मसाले की डिब्बी बेच रही थी. धीरे धीरे सुषमा का काम बड़ा और उसने मसालों का खुद का कारोबार शुरू कर दिया, जिसके बाद से आज तक उन्हें मसालो के बड़ी-बड़ी कंपनियां आर्डर देती है और वह करोड़ो की मालकिन भी बन चुकी है।