लाखों रूपए की नौकरी को छोड़ कैसे 39 साल की उम्र में ज्वाइन की भारतीय सेना


एक उम्र के बाद लोग अपने सपनों को उम्र के कारण ही छोड़ देते है। बहाना ये बनाते हैं कि यार अब उम्र हो गई लेकिन असल में उम्र नहीं होती वो खुद अपने सपनों के आगे हार मान चुके होते हैं। 30 साल के बाद दुनिया में हर आदमी ने ये लकीर खींच रखी है कि अब सेट होना चाहिए, एक परिवार बनाना है, शादी-बच्चे, सपनों का क्या है, वो तो जवानी में होते हैं। अगर आप ऐसा सोचते हैं और अपने सपनों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की बात करते हैं तो जनाब आप आगे नहीं बढ़ रहे।

आप बहुत ही पीछे खड़ें हैं। जो अपने सपनों का नहीं हुआ, वो अपनों का क्या होगा। आज आपको बताने वाले हैं सतीश कुमार की कहानी, जिन्होंने 39 वर्ष में इंडियन आर्मी ज्वाइन की और बता दिया कि सपनों के साथ समझौता नहीं करना चाहिए। इंडिया टाइम्स के मुताबिक, Sathish Kumar ने अपनी कहानी लिंकडेन पर शेयर की। उन्होंने भारतीय सेना की प्रादेशिक सेना इकाई ज्वाइन की है, वो भी 39 वर्ष की उम्र में। उन्होंने अपने सेलेक्शन का पूरा प्रोसेस शेयर किया है, ताकि लोगों को मोटिवेशन मिले। उन्होंने बताया कि वो उन 2079 कैंडिडेट्स में से थे जो 1.5 लाख कैंडिडेट्स में से लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू के लिए सेलेक्ट हुए थे।

जब वो इंटरव्यू के लिए पुणे पहुंचे, तो उन्होंने अपने साथ इंटरव्यू दे रहे लोगों को देखा। वहां सभी 30 से कम उम्र के थे और वो खुद उस समय 37 वर्ष के थे। उन्हें यह लगा कि अगर वो रिजेक्ट होंगे तो उसके पीछे का एकमात्र कारण उनकी ऐज ही होगी। एक मेजर जनरल, दो लेफ्टिनेंट कर्नल ऑफिसर और एक मनोवैज्ञानिक को इंटरव्यू देने के बाद सतीश अगले राउंड के लिए सेलेक्ट हो गए। यह था एसएसबी। यह पांच दिन का प्रोसेस है जोकि हर ऑफिसर को क्लीयर करना होता है और यह सेलेक्शन का सबसे मुश्किल पार्ट होता है। 816 कैंडिडेट्स को दो ग्रुप्स में बांट दिया। पहले उनका बैच अप्रैल 2020 में शुरू होना था लेकिन कोविड के कारण वो जुलाई 2020 में शुरू हुआ।

पहले दिन 172 कैंडिडेट्स वहां आए, जिन्में से 16 कैंडिडेट्स 6 घंटों की स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद आगे पहुंचे। सतीश को मालूम था कि अगले चार दिन बहुत मुश्किल होने वाले हैं। वो उन चार कैंडिडेट्स में से थे जो इस मुश्किल को पार कर मेडिकल एग्जामिनेशन में पहुंचे। इसके बाद मेडिकल एग्जामिनेशन में चारों कैंडिडेट्स ही रिजेक्ट हो गए। हालांकि रिजेक्शन के बाद भी एक बार अपील करने का मौका मिलता है। तो उन्होंने कमांड हॉस्पिटल बेंगलुरु चुना और सितंबर 2020 में उनका मेडिकल क्लीयर हो गया।

इसके बाद उनका डॉक्यूमेंटेशन हुआ। तकरीबन छह महीने इंतजार करने के बाद अप्रैल 2021 में उन्हें ऑफर लेटर मिला। वो कहते हैं, ‘मैं 118 इन्फेंट्री बटालियन Grenadiers Regiment में असाइन किया गया। मेरे लिए यह गर्व का पल था। जब ऑफर लेटर मेरे हाथ आया तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। एक महीने बाद मैंने यूनीट में रिपोर्ट किया। फिर चार हफ्ते मेरी फिजिकल ट्रेनिंग चली।’ दो वर्षों बाद वो लेफ्टिनेंट बने। तो समझे सपने ही अपने हैं पूरा करो, अधूरे ना छोड़ो।