अम्बानी परिवार की ये सच्चाई जो आज से पहले न कभी सुनी होगी न पढ़ी होगी, आइये जानिए।


अक्सर आपने कई अमीर परिवार की कहानी सुनी होगी तो वह फर्श से अर्श तक की होगी। कोई पहले से अमीर नहीं बनता बल्कि खूब मेहनत कर के खुद का ये मुकाम हासिल करता है। जैसे की आप अम्बानी परिवार को जानते ही होंगे इनकी बुलंदियां और ऊंचाइयां किसी से छुपी नहीं है। ये एशिया और भारत के सबसे अमीर व्यक्ति है वह बेहद लक्ज़री जीवन जीते है लेकिन कोई ये नहीं जनता इसके पीछे छुपी है उनकी मेहनत। धीरुभाई अंबानी ने छोटे स्तर पर Reliance Industries की शुरुआत की थी.

इसके बाद मेहनत और लगन से उसे बड़ा बना दिया. अंबानी सिर्फ़ हिंदुस्तान ही नहीं, बल्कि एशिया के अमीर लोगों में से एक हैं.आज के समय उन्होंने खुद का एक बहुत बड़ा नाम बना लिया है। अक्सर हम लोग इनके जीवन के बारे में कुछ जानना चाहते है लेकिन इंटरनेट पर पूरी जानकारी न होने की वजह से जान नहीं पाते आज हम आपको इनकी पूरी कहानी बताते है। आज हम आपको चमक-धमक के पीछे वाली सच्चाई बताते है. कई बार हमें सिर्फ़ वही दिखता है, जो हम देखना चाहते हैं.

इसलिये आज देखिये अंबानी परिवार की वो अनदेखी तस्वीरें, जिसमें उनके परिवार के कई राज़ छिपे हैं. जानकारी के लिए आपको  धीरुभाई अंबानी का जन्म गुजरात के चोरवाड में हुआ था और उनके पिता गांव के स्कूल में पढ़ाते थे.

उनका शुरुआती करियर बेहद छोटे बिजनेस के तौर पर हुआ उन्होंने छोटे स्तर पर व्यापार शुरु किया, कई बाधाएं आईं, पर वो आगे बढ़ते गये.लेकिन उनके लिए पहले बिज़नेस में पैर जमाना उतना आसान नहीं था। खूब मेहनत और लग्न से उन्होंने खूब ऊंचाइयों तक अपना बिज़नेस पहुँचाया लेकिन तब भी वह संतुस्ट नहीं थे। पांच भाई-बहनों में वो अपने पिता की तीसरी संतान थे.

आपको बता दे 1955 में धीरूभाई अंबानी ने कोकिलाबेन को अपनी जीवनसंगिनी बनाया और उसके बाद उनकी क़िस्मत में ख़ुशियां आने लगीं.  उन्हें ज़िंदगी में बहुत कुछ करना था, इसलिये वो कभी रिस्क लेने से नहीं डरते थे. शुरू से ही वह बड़ा करने के सपने देखते थे जिसके चलते उन्होंने बड़ा सेट अप करने की सोची। वो 1958 में मुंबई आये और अपना ख़ुद का व्यापार शुरू किया.

वो चार बच्चों के पिता थे. मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, दीप्ति सालगांवका और नीना कोठारी. बेटों को दुनिया जानती है. पर बेटियां लाइमलाइट से दूर रहती हैं. शुरू से ही उनके बड़े बेटे मुकेश अंबानी में धीरूभाई अंबानी की झलक दिखती है. हिंदुस्तान आने से पहले वो यमन में एक कर्मचारी के तौर काम करते थे और महज़ 1000 रुपये लेकर हिंदुस्तान आये थे.  वो हमेशा नये प्रोजेक्ट पर काम करते रहते थे. उनकी रूचि कुछ अलग करने की थी। व्यापार के साथ-साथ वो परिवार पर भी पूरा ध्यान देते थे. कामयाबी के प्रति लगन और जुनून क्या होता है, ये कोई अंबानी से सीखे.