तमाम कोशिशों के बाद भी नहीं आई आँखों की रौशनी, फिर दिखा नर्मदा माई का चमत्कार, पढ़िए नर्मदा माई भक्त सलीम की कहानी


मध्य प्रदेश के मंडला जिले में संप्रदायिक सौहार्द की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली है। यहां एक मुस्लिम व्यक्ति लाठी, झोला और हाथ में कमंडल लेकर नर्मदा की परिक्रमा के लिए निकल पड़ा। सलीम का कहना है कि नर्मदा नदी की परिक्रमा की वजह से उसकी आंखों की रौशनी वापस आ गई। यह शख्स महाराष्ट्र के नासिक का रहने वाला सलीम इस्माइल पठान है, जिसे नर्मदा भक्त के तौर पर भी जाना जाता है। आंधी की धुल  से उनकी आंखों की रौशनी चली गई। उन्होंने खूब कोशिश और खूब इलाज कराया। की, आंखों रौशनी वापस नहीं आई।

वह 14 सालों तक अंधे रहे। फिर एक दिन उनके गांव के जनार्दन गिरी के एक शिष्य ने उन्हें अपने गुरुजी के पास चलने को कहा। उन्होंने उनकी बात मानी और वे उनसे मिलने गए। सलीम आगे बताते हैं कि उनकी मुलाकात जनार्दन गिरी के एक शिष्य महामंडलेश्वर शांतिगिरी से हुई। वह मौन धारण किए हुए थे। वो लिखकर देते थे और उनके शिष्य लोग पढ़कर बताते थे। उन्होंने कहा कि आंख की रौशनी वापस पाने के लिए उन्हें शांतिगिरी की बात माननी होगी। वह जो कहेंगे उन्हें वह करना पड़ेगा। सलीम ने हामी भर दी।

सलीम ने इसके बाद यह बताया कि शांतिगिरी द्वारा बताए गए उपाय से कैसे केवल 21 दिनों में उनकी आंखों की रौशनी वापस आ गई। उन्होंने कहा कि स्वामी शांतिगिरी ने उन्हें सही रास्ता बताया। फिर उन्होंने उनसे पूछा कि आगे क्या करना है। सलीम ने उनसे दो दिन का वक्त मांगा और अपने माता-पिता और रिश्तेदारों से मिला। गांव में मुस्लिम समाज और मौलानाओं से मिला।

सब कोई खुश हुआ।सलीम ने यह भी बताया कि शांतिगिरी ने नाम नहीं बदलने दिया। उन्होंने कहा कि धर्मचार्य ने उनसे कहा कि अब तुम्हारा नाम बदला जाएगा। इस पर उन्होंने बताया कि शांतिगिरी ने कहा कि नाम नहीं बदलेगा। नाम सलीम ही रहेगा। अपना धर्म पालन करते रहेंगे। आंख की रौशनी तुम्हारे कर्म की वजह से वापस आई है। सलीम हिंदू धर्म अपना चुके हैं, लेकिन अपने धर्म का पालन करते हैं। भजन-कीर्तन के साथ-साथ वे नमाज भी पढ़ते हैं।