कभी टेढ़ी गर्दन का लोग उड़ाते थे मजाक, आज भारत की यंगेस्ट CEO बन कर दी सबकी बोलती बंद


भारत के युवा चीफ एग्जिक्‍यूटिव ऑफिसर्स में शामिल एडलवाइज MF की CEO राधिका गुप्‍ता की सफलता की कहानी काफी दिलचस्‍प है।स्‍कूल में अपनी टेढ़ी गर्दन और बोलने के भारतीय लहजे के कारण राधिका हमेशा हंसी का पात्र बनीं। कॉलेज के बाद लगातार नौकरी पाने में असफल होने पर उन्‍होंने आत्‍महत्‍या करने तक की तैयारी कर ली, पर खुशकिस्‍मती से उनके दोस्‍तों ने मौके पर पहुंचकर उन्‍हें बचा लिया। एक बार नौकरी मिलने के बाद राधिका ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 33 साल की उम्र में ही वे सीईओ बन गईं।

टेढ़ी गर्दन की वजह से बना मजाक

इंस्टाग्राम पोस्ट में राधिका ने लिखा, ‘मैं टेढ़ी गर्दन के साथ पैदा हुई थी। इसको लेकर बचपन से ही मेरा मजाक बनाया गया है। मेरा टेढ़ी गर्दन के साथ पैदा होना, मुझे घर से बाहर करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। मैं स्कूल में हमेशा से सबके लिए अनजान और नई बच्ची थी। पिताजी एक राजनयिक थे। नाइजीरिया आने से पहले मैं पाकिस्तान, न्यूयॉर्क और दिल्ली में रहती थी। मेरे इंडियन एक्सेंट को देखकर, मेरा नाम स्कूल में अपू’ रख दिया गया था, जो सिम्पसन्स का एक पात्र था।”

आत्मसम्मान को पहुंचा ठेस

जिसकी वजह से कम उम्र में कई बार उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा। उनकी तुलना उसी स्कूल में काम करने वाली उनकी मां से की गई थी। लोग टिप्पणी करते थे कि वे अपनी मां की तुलना में कितनी अनाकर्षक है।समय के साथ उन्होंने इन सब चीजों से बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन ये दूर नहीं हुआ।

मां से तुलना कर कहा जाता था बदसूरत

राधिका गुप्ता आगे बताती हैं, ”मेरे स्कूल में हमेशा मेरी तुलना मेरी मां से की जाती थी, वह एक बहुत ही सुंदर और तेजस्वी महिला थी। मुझे उनके मुकाबले कहा जाता था कि मैं उनकी तुलना में कितनी बदसूरत दिखती हूं। स्कूल में मेरा आत्मविश्वास हमेशा कम ही रहा।”

आत्महत्या की कोशिश की

जब वे 22 की हुईं और सातवीं बार नौकरी का रिजेक्शन झेला तो उन्होंने अपने हॉस्टल के कमरे आत्महत्या करने की कोशिश की, तब उनके दोस्त ने उन्हें बचाया था। इसके बाद राधिका को मेंटल केयर में रखा गया और उन्हें डिप्रेशन का शिकार बताया गया। राधिका को वहां से केवल तब जाने दिया गया जब उनके पास नौकरी का ऑफर आया और उन्हें इंटरव्यू के लिए जाना था। वो इंटरव्यू के लिए गईं और उन्हें मैकिन्से में नौकरी मिल गई।

बताया कैसे आई भारत?

राधिका गुप्ता ने आगे कहा, ”मेरी जिंदगी में सबकुछ सही चल रहा था, सब ट्रैक पर था। लेकिन 3 साल बाद 2008 में वित्तीय संकट से बचने के बाद, मैंने भारत आने का फैसला किया। इसलिए 25 साल की उम्र में मैं भारत आई और अपने पति और दोस्त के साथ मिलकर अपनी खुद की संपत्ति प्रबंधन फर्म शुरू की।”

पेश की कामयाबी की मिसाल

एडलवाइस MF ने कुछ साल बाद उनकी कंपनी खरीद ली। इसके बाद उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में अपने तरीके से काम करना शुरू कर दिया। उनके पति ने उन्हें एडलवाइस एमएफ में सीईओ की भूमिका के लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित किया। उस वक्त उन्होंने खुद से पूछा कि ‘वे मुझे नौकरी क्यों देंगे?’ फिर उन्होंने सोचा कि ‘इस पद के लिए वे सबसे अच्छी उम्मीदवार हैं। उनके पति ने उन्हें और मजबूती दी। फिर क्या था 33 साल की उम्र में राधिका गुप्ता भारत की सबसे कम उम्र की सीईओ बन गईं।

लोग मुझे ‘टूटी हुई गर्दन वाली लड़की’ के नाम से जानते हैं

राधिका गुप्ता ने आगे कहा, ” मेरे सीईओ बनते ही अगले साल, मुझे एक कार्यक्रम में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया- मैंने अपनी बचपन की असुरक्षा और आत्महत्या के प्रयास को साझा किया। मैंने वहां सबकुछ दिल खोलकर बोला, मेरी बातों से लोग प्रेरित हुए। मुझे ‘टूटी हुई गर्दन वाली लड़की’ के रूप में जाना जाने लगा। लोगों ने मेरे साथ अपनी कहानियां साझा कीं। इसने मुझे अपनी ‘खामियों’ को पूरी तरह से अपनाने का विश्वास दिलाया। और पिछले 4 वर्षों में, मैंने अपनी कहानी के बारे में सबको बताया है। मैंने एक किताब भी लिखी थी।