वो महिला जो बनी भारत की सबसे लंबे समय तक जेल में रहने वाली कैदी, राजीव गाँधी हत्या में था बड़ा हाथ


मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या स्वतंत्र भारत के सबसे हाई प्रोफाइल मामलों में से एक थी। कई रहस्यों और हत्या के पीछे की अप्रमाणित साजिश की जांच अभी भी एक बहु-विषयक निगरानी एजेंसी द्वारा की जा रही है जो CBI और रॉ के साथ समन्वय में काम करती है। नलिनी एकमात्र आरोपी थी जिसे श्रीपेरंबदूर में उसकी उपस्थिति के लिए जीवित पकड़ा गया था जब राजीव को 21 मई, 1991 को लिट्टे के मानव बम द्वारा मार दिया गया था।

पूर्व पीएम राजीव गांधी हत्या में है नलिनी श्रीहरन दोषी

राजीव गांधी की हत्या के दोषी 7 लोगों को टाडा कोर्ट ने फ़ांसी की सज़ा दी थी। इन्हीं में से एक नलिनी श्रीहरन है जो आज भी जिंदा है और सजा काट रही है। दूसरे दोषियों की तरह इनकी भी सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था। ये जेल में सबसे लंबे अरसे तक रहने वाली महिला कैदी भी हैं। इस केस में सज़ा पाने के बाद भी इनका जीवन विवादों से घिरा रहा है। चलिए जानते हैं नलिनी श्रीहरन बारे में…

नलिनी श्रीहरन का परिचय

एथिराज कॉलेज से अंग्रेजी भाषा और साहित्य में स्नातक, नलिनी चेन्नई में एक निजी फर्म के साथ काम कर रही थी। वह पद्मावती, एक नर्स और पी शंकर नारायणन, एक पुलिस निरीक्षक, से पैदा हुए तीन बच्चों में सबसे बड़ी थीं, जिनकी 2016 में मृ!त्यु हो गई थी। माता-पिता के बीच वैवाहिक समस्याओं के कारण उनका बचपन सुखी नहीं था। जब वह किशोरी थी तब उसके पिता ने अलग रहने के लिए घर छोड़ दिया; खुद नलिनी, एक स्नातक छात्र के रूप में, अपनी माँ के साथ लड़ी और शहर में एक महिला रिश्तेदार के समर्थन से अकेले रहने चली गई।

31 साल में 3 बार जेल से बाहर आई

अतीत में नलिनी श्रीहरन केवल 3 बार पैरोल पर जेल से बाहर आई है – एक बार 2016 में उसके पिता की मृ**त्यु के बाद। दूसरी बार नलिनी को उसकी याचिका के बाद पैरोल दी गई थी, जिसमें उसने कहा था कि उसे अपनी बेटी की शादी की व्यवस्था करनी है, जिसे मद्रास उच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था। नलिनी की बेटी हरिथरा, जो एक चिकित्सक है, लंदन में रहती है। तीसरी बार दिसंबर 2021 में मां की स्वाथ्य खराब होने पर।

2019 में मर्सी किलिंग के लिए की गुहार

 

नलिनी श्रीहरन ने 2019 में पीएम मोदी और तमिलनाडु हाईकोर्ट को चिट्ठी लिखी थी। इसमें उसने मर्सी किलिंग यानी दया हत्या की मांग की थी। बताया जाता है, नलिनी और अन्य कैदी के बीच झगड़ा हुआ था। दोनों के झगड़े की बात जेलर तक पहुंच गई थी जिसके बाद नलिनी ने जान देने की कोशिश की। नलिनी ने इतने सालों में पहली बार ऐसा कदम उठाया।

नलिनी पर बन चुकी है जीवनी

अपनी आत्मकथा में, नलिनी ने अपने बचपन, मुरुगन से अफेयर, जिन हालात में वह राजीव गांधी की हत्या की गवाह बनी, पांच दिन तक भागने की कोशिश, गिरफ्तारी, कस्टडी के दौरान मिली प्रताड़ना, जेल में उसके बच्चे का जन्म, सजा के ऐलान और जेल की जिंदगी के बारे में सब कुछ विस्तार से लिखा है। किताब में सबसे दिलचस्प हिस्सा उसकी प्रियंका गांधी के साथ 19 मार्च, 2008 को हुई 90 मिनट की मुलाकात है। इस मुलाकात के बारे में दुनिया को टाइम्स ऑफ इंडिया में 15 अप्रैल, 2008 को छपी एक रिपोर्ट के जरिए पता चला था।

फिर से बेल पर रिहा होने की अर्जी डाली

आपको बता दे, कुछ समय पहले राजीव गांधी के हत्या के दोषी एजी पेरारीवलन को जेल से रिहा किया गया है। उसे सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए रिहा कर दिया। उसकी रिहाई के बाद नलिनी ने भी कोर्ट में बेल पर बाहर आने की अर्जी डाली है। उसकी मां को उम्मीद है कि वो भी पेरारीवलन की तरह जेल से रिहा हो जाएगी।