अपने जिगर के टुकड़े को हमेशा जिंदा रखने के लिए मां ने अपनाया अनोखा तरीका, पूरी की बेटे की अधूरी इच्छा


इस संसार में अगर किसी इंसान को कोई खुद से भी ज्यादा चाहता है वो भी बिना किसी उम्मीद के तो वह है हमारे माता-पिता जी हाँ एक माता-पिता है जो अपनी संतान को बिना कुछ मतलब के प्यार करते है। उन्हें बच्चे से कोई स्वार्थ नहीं होता बस उनका लगाव ही अपने बच्चे के प्रति इतना होता है कि आज तक कोई इंसान उनकी जगह न ले पाया। माता-पिता हमेशा भगवान से यही मांगते हैं कि हमारे बच्चे हमेशा खुश रहें। उनके ऊपर कोई भी मुसीबत ना आए। माता-पिता अपने बच्चों पर आई मुसीबत का खुद सामना कर लेते हैं लेकिन अपने बच्चों को कुछ नहीं होने देते हैं।अब एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है।

आज जो मामला हम आपको बताने जा रहे है उसे जानने के बाद आप भी इमोशनल हो जाएंगे। आपको बता दें कि 42 वर्षीय एस.पसुमकिझी तमिलनाडु के ओड्डमछत्रम स्थित विनोभा नगर की रहने वाली हैं। 28 जून 2020 की बात है, जब एक हादसे में उन्होंने अपने बेटे को खो दिया था। बेटे की मृत्यु के पश्चात हर तरफ मातम पसर गया। जब पसुमकिझी ने अपनी आंखों के सामने अपने जवान बेटे का बेजान शरीर पड़ा हुआ देखा तो उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट गया। जब पसुमकिझी से उनका जिगर का टुकड़ा दूर हुआ था, वह रविवार का दिन उनके लिए किसी भयानक दिन से कम न था।

जैसे ही माँ ने अपने बेटे कि बॉडी को देखा तो वह  भगवान से प्रार्थना कर रही थीं कि किसी तरह उनका बेटा उन्हें वापस मिल जाए। लेकिन जो एक बार इस दुनिया से चला गया, वह भला कहां वापस लौटकर आता है? लेकिन ये मां अपने बेटे की मौत के 2 साल के बाद रविवार के दिन अपने जिगर के टुकड़े को वापस लेकर आ गई।अब आप सोच रहे होंगे ऐसा कैसे हो सकता है इस दुनिया से जो चला जाए उसका आना मुमकिन नहीं फिर ये कैसे ?आइये आपको बताते है।

मिली जानकारी के अनुसार  पसुमकिझी लगातार अपने बेटे पांडिदुरई को याद करती रहीं। समय तो बीतता चला गया परंतु वह अपने बेटे को भुला नहीं पा रही थीं। ऐसी स्थिति में उन्होंने अपने बेटे पांडिदुरई की एक प्रतिमा बनाने का निर्णय लिया। रविवार को उनके घर में कान छिदवाने की रस्म चल रही थी। इसी मौके पर पांडिदुरई की सिलिकॉन की आदमकद प्रतिमा लाई गई।पसुमकिझी के अनुसार 2 साल पहले भी इसी कान छिदवाने की रस्म की तैयारी चल रही थी। लेकिन हादसे में उनके बेटे की जान चली गई। लेकिन बेटे की कमी को पूरा करने के लिए उसकी आदमकद प्रतिमा बनाने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने बताया कि पसुमकिझी के बेटे पांडिदुरई की यह बड़ी इच्छा थी कि उसके भतीजे और भतीजी के कान छिदवाने की रस्म धूमधाम से उसके गोद में बैठ कर पूरी हो। ऐसे में उसके बिना यह रस्म भला कैसे पूरी हो सकती थी। तब परिवार के सदस्यों ने बेटे की इच्छा पूरी करने के लिए उसकी प्रतिमा बनवाने का निर्णय लिया।आपको बता दें कि परिवार में बच्चों को मूर्ति की गोद में बैठा कर पूरी रस्म को संपन्न कराया। पांडिदुरई की प्रतिमा को रथ से कार्यक्रम स्थल पर लाया गया। इस दौरान उन्होंने कमीज पहनी हुई थी। एस. पसुमकिझी ने यह निर्णय लिया कि वह अपने बेटे की मूर्ति को लिविंग रूम में रखेंगे।