भारत का एक अनोखा पुराना किला जहा से आज भी दिखता है पूरा पकिस्तान


भारत एक ऐसा राष्ट्र है जहां बहुत सारे राजाओं-महाराजाओं ने राज किया अपने सुरक्षित निवास के लिए सभी ने अपने अपने तरीके से किलों का निर्माण भी किया. जो अपने आप में आज भी खास है. वैसे लिस्ट तो बहुत लंबी है पर हम आपको आज ऐसे किले के बारे में बतायेंगे जो पांच सौ साल पुराना है और इस किले से पूरा पाकिस्तान दिखाई देता है.

कहा जाता बटवारे के दौरान इसपर कब्जा जमाने की कोशिश पाकिस्तान ने की मगर नाकाम रहा. तो चलिए जानते है राजस्थान के मेहरागढ़ किले के बारे में…! मेहरानगढ दुर्ग भारत के राजस्थान प्रांत में जोधपुर शहर में स्थित है. पन्द्रहवी शताब्दी का यह विशालकाय किला, पथरीली पहाड़ी पर १२५ मीटर ऊँचाई पर निर्मित है. जो कुतुबमीनार से भी ऊंचा है.

500 साल पुराने इस किले से दिखता है पूरा पाकिस्तान. 1965 में भारत-पाक के युद्ध में सबसे पहले मेहरानगढ़ के किले को टारगेट किया गया था. लेकिन माना जाता है कि माता की कृपा से यहां किसी का बाल भी बांका नहीं हुआ. जोधपुर शासक राव जोधा ने 12 मई 1459 को इस किले की नींव डाली और महाराज जसवंत सिंह (1638-78) ने इसे पूरा किया.

किले की खासियत – इस किले के दीवारों की परिधि 10 किलोमीटर तक फैली है. इनकी ऊंचाई 20 फुट से 120 फुट तथा चौड़ाई 12 फुट से 70 फुट तक है. इसके परकोटे में दुर्गम रास्तों वाले सात आरक्षित दुर्ग बने हुए थे. घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं. किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार दरवाजे, जालीदार खिड़कियां हैं.

चामुँडा माता का मंदिर- राव जोधा को चामुँडा माता मे अथाह श्रद्धा थी. चामुंडा जोधपुर के शासकों की कुलदेवी होती है. राव जोधा ने १४६० मे मेहरानगढ किले के समीप चामुंडा माता का मंदिर बनवाया और मूर्ति की स्थापना की. मंदिर के द्वार आम जनता के लिए भी खोले गए थे. चामुंडा माँ मात्र शासकों की ही नहीं बल्कि अधिसंख्य जोधपुर निवासियों की कुलदेवी थी और आज भी लाखों लोग इस देवी को पूजते हैं.

नवरात्रि के दिनों मे यहाँ विशेष पूजा अर्चना की जाती है. कहा जाता माता के आशीर्वाद से ही सन १९६५ में पाकिस्तान के हमले के दौरान किले का कोई बाल बाका नहीं कर सका.