IAS बनने का इस कदर चढ़ा जुनून , 5 लाख की नौकरी छोड़ डॉक्टर ने पास की UPSC परीक्षा, आज हैं IAS अफसर


आईएएस अफसर बनना जितना सुनने में आसान लगता है उतना ही बनने में। सबसे पहले इतना सफल बनने के लिए इसके एग्जाम के लिए प्रिपरेशन करनी पड़ती है दिन रात। उसके बाद ये एग्जाम क्रैक करने के बाद इंटरव्यू फिर जॉब ये जॉब जितनी आराम दायक लगती है और उतनी असल में नहीं होती। अक्सर लोग समझते है एक बार आईएएस बन गए तो खूब पैसा आएगा लेकिन ऐसा नहीं। आपको बता दे ये जॉब सिर्फ अपने ही करियर को चमकाने के लिए नहीं बल्कि दुसरो की मदद के लिए है इसमें एक बार ड्यूटी मिल जाने के बाद इंसान को सिर्फ दुसरो के लिए ही सोचना पड़ता है , जी हाँ आज की हमारी स्टोरी इसी पर आधारित है आइये जानिए।

सबसे पहले हम आपको बताते है कि धीरज को सफलता कैसे मिली ?शुरू से ही धीरज समाज के लिए कुछ करना चाहते थे उनकी रूचि समाज सुधार में शुरू से ही थी। धीरज ने 2019 की यूपीएससी परीक्षा जिसका परिणाम अगस्त 2020 में आया है, को 64वीं रेंक के साथ पहले प्रयास में पास किया। वो एक मध्यवर्गीय परिवार से हैं और ग्रामीण क्षेत्र में पले बढ़े हैं। धीरज मूलरूप से गोरखपुर, उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। उनकी 12वीं तक की पढ़ाई गांव के पास ही के एक हिंदी मी़डियम स्कूल से हुई है।

पढ़ाई में वह शुरू से ही रूचि रखते थे लेकिन एक समय ऐसा था जब उनके घर के हालात भी उनका साथ नहीं दे रहे थे। धीरज की मां अक्सर बीमार रहती थीं। उनके पिता दूसरे शहर में नौकरी करते थे। और धीरज कुछ बनना चाहते थे ,इस कारण धीरज को अक्सर बनारस से अपने गांव का सफर करना पड़ता था, इस वजह से उन्हें कई बार तो हर हफ्ते घर आना होता था और पढ़ाई बहुत प्रभावित होती थी। इसका हल उन्होंने सोचा कि अगर वो बड़े अफसरों से गुजारिश कर अपने पापा का ट्रांसफर अपने ही शहर में करा लें तो काफी अच्छा रहेगा। लेकिन जब उन्होंने इस बाबत अधिकारियों से बात की तो उनका काम करने की बजाए उनके साथ बेहद खराब ढ़ंग से बात की। उन्होंने सोचा कि अगर मैं एक पढ़ा लिखा डॉक्टर होकर अपने एक छोटे से काम को नहीं करा पा रहा हूं तो आम आदमी की क्या हालत होती होगी।

हालाँकि उनके इस फैसले से उनके घरवालों से लेकर उनके दोस्त तक अचंभित थे। उनके माता-पिता और कई दोस्तों ने उन्हें समझाया भी कि एक बना बनाया करियर छोड़ दूसरी लाइन में जाना सही नहीं होगा। ये मानकर धीरज ने फैसला किया कि अगर पहले प्रयास में परीक्षा वो पास नहीं कर पाए तो वो मेडिकल फील्ड में ही वापस आ जाएंगे। उन्होंने पूरी मेहनत के साथ परीक्षा की तैयारी की। इसके लिए उन्होंने हर विषय को महत्वपूर्ण मानकर उसका बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने कोचिंग भी ली। इसका परिणाम ये रहा कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को 64वीं रेंक के साथ पास कर लिया। आज उनके पिता और दोस्तों को उनपर गर्व है।