बिहार के भागलपुर में बना वर्ल्ड रिकॉर्ड: पांच लाख आठ हजार दीपों से सजाई गई भगवान श्री राम की आकृति


रविवार को होने वाले रामनवमी पर्व को लेकर पूरे देश में हर्षोल्लास का माहौल है. रामनवमी को लेकर बिहार में भी खास तैयारियां चल रही है. इस कड़ी में भागलपुर में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की भी तैयारी है. शहर के लाला लाजपत राय शाखा मैदान में पांच लाख दीपकों के बीच भगवान श्रीराम का भव्य स्वरूप बनकर तैयार हो गया है. इसे देखने के लिए कई केंद्रीय मंत्री, राज्य के मंत्री के साथ जाने माने हस्तियों को आमंत्रित किया गया है.

स्थानीय कलाकारों के द्वारा पांच लाख आठ हजार दीपों से श्रीराम की आकृति बनायी गयी थी। इनके चारों ओर 11 हजार दीप जलाये गये। जय श्रीराम, भारत माता की जय की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया था। कई महिलाएं दीप लेकर पार्क पहुंची थी और वहां आरती की। दीपक को सजाने के लिए बिहार-बंगाल के कलाकार भागलपुर पहुंच कर इसे फाइनल टच दे रहे हैं.

7800 स्क्वायर फीट में पांच लाख से अधिक दीपक जलाए जाएंगे. मोजाइक आर्ट द्वारा अभी तक 5400 स्क्वायर फीट में दीपक जलाने का गिनीज वल्र्ड रिकार्ड है. इस रिकार्ड को तोडऩे की योजना बनाई गई है. गिनीज वल्र्ड रिकार्ड की गणना करने के लिए तमिलनाडु से अधिकारी भी बिहार के भागलपुर पहुंचे हैं.

इस मौके पर मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम हर लोगों के कण-कण में बसते हैं। शानदार आयोजन किया गया। यहां के कलाकारों ने भव्य श्रीराम की आकृति बनायी। जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं। यह वर्ल्ड रिकॉर्ड भागलपुर व बिहार की ख्याति को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम थे। वह 14 वर्ष के वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे और दीपोत्सव मनाया गया था। आज उसी तरह का नजारा भागलपुर में दिखा। हर इंसान को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। वह सभी के लिए हर हमेशा आदर्श रहेंगे।

आज से होने वाले कार्यक्रम को लेकर सोमवार को ही भूमि पूजन किया गया था. कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक अर्जित शाश्वत चौबे हैं. भारतीय नव वर्ष आयोजन समिति के बैनर तले कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. भूमि पूजन के दौरान भारी संख्या में लोग शामिल हुए थे. भगवान श्रीराम आकृति को 25 से अधिक कलाकारों ने बनाया है. 12 रंगों से सजे 5 लाख दीयों से श्रीराम की तस्वीर को बनाया गया है. इस आयोजन में 300 से अधिक कार्यकर्ता सप्ताह भर से जुटे थे. 100 लीटरों रंगों का इस्तेमाल दीपों को रंगने में किया गया है.