‘कंडेक्टर की दरियादिली’ बस में सवार होने वाले हर यात्री को टिकट देने से पहले पिलाता है पानी


आज के समय में कोई व्यक्ति किसी की मदद कर रहा है, यह तो आपके कान सुनने को तरस जाते होंगे लेकिन हरियाणा के रहने वाले सुरेंद्र के बारें में यदि आप सुनेंगे तो ज़रूर कहेंगे की ऐसी सोच वाले व्यक्ति और भी होने चाहिए|

लोगों को पिलाते है पानी

यह कहानी रोहतक के रहने वाले सुरेंद्र शर्मा की है सुरेंद्र हरियाणा बस में एक कंडेक्टर है वह तक़रीबन 12 सालों से अपनी बस में आए हुए लोगों को पानी पिलाते है| उसके बाद यात्रिओं को बस में बैठाते है अब आप कहएंगे की सुरेंद्र केवल पानी पिलाने का ही काम तो कर रहे है इसमें क्या बड़ी बात है लेकिन उनकी दरियादिली को देखकर आज पुरे देश में इन्हे सम्मान की नज़रो से देखा जा रहा है| दिल्ली का मौसम कब कैसे करवट लें ले, यह किसी को पता नहीं रहता है कुछ समय पहले पड़ रही भीषण गर्मी के बीच लोगों का पानी पिलाना पुण्य का काम है| कुछ लोग अपने घर से जल्दबाज़ी में निकलने के कारण अपनी पानी की बोतल भूल जाते है या फिर बैग में रखा पानी इतना गर्म हो जाता है की उसे छूने तक का मन नहीं करता है| सुरेंद्र शर्मा जो कार्य कर रहे है उसकी तारीफ करते हुए कोई नहीं थकता है|

आईएएस अवनीश ने शेयर किया ट्वीट

IAS अधिकारी अवनीश शरण ने जब सुरेंद्र को लोगों को पानी पिलाते हुए देखा| तब उन्होंने उनकी कहानी को ट्विटर पर शेयर की किया और लिखा- हरियाणा के बस कंडक्टर सुरेंद्र शर्मा पिछले 12 सालों से लोगो को पानी पिलाने कर पुण्य का काम कर रहे है| अपनी नौकरी के शुरू होने के वक़्त ही उन्होंने यह धार्मिक कार्य करना शुरू कर दिया था| वह बस में चढ़ने वाले सभी यात्रिओं को गिलास पानी पिलाते है| अपने इस ट्वीट में अवनीश शरण ने उनकी एक फोटो भी शेयर की, जिसमे देखा जा सकता है की उनके एक हाथ में लोटा है और यात्रिओं को पानी पीला रहे है|

कमेंट में लोगो ने की तारीफ

इस ट्वीट को अभी तक हज़ारो लोग लाइक कर चुके है और शेयर भी कर रहे है लोग कमेंट में सुरेंद्र की तारीफ करते हुए नहीं थक रहे है| एक यूज़र लिखता है, बस कंडक्टर काफी बुरा बर्ताव करते है इस बीच सुरेंद्र जैसे कंडक्टर का होना काफी गर्व की बात है| वही एक अन्य यूजर लिखता है, जो शक्स लोगों को पानी पिलाता है वह अच्छा इन्सान होने के साथ-साथ अपने काम पर भी काफी गर्व महसूस करता है वही एक यूज़र ट्वीट पर कमेंट करके बताती है कि सुरेंद्र केवल पानी ही पीला कर पुण्य का काम नहीं करते, वह उन यात्रिओं के लिए अपनी सीट भी छोड़ देते है जिहे सीट नहीं मिल रही होती है|