अधूरी रह गई जनरल बिपिन रावत की ये इच्छा,उनके चाचा ने किया इस बात का खुलासा।


भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य सैन्य कर्मियों की तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार (08 दिसंबर) को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में दुर्भाग्य पूर्ण मृत्यु हो गई।जानकारी के मुताबिक, जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी का पार्थिव शरीर आज दिल्ली छावनी लाया जाएगा और शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। इनके पार्थिव शरीर को आज एक सैन्य विमान से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचाया जाएगा।जैसे ही उनके जाने की खबर उनके पैतृक गांव में फैली तो वहां शोक की लहर आ गयी किसी को इस बात पर यकीन नहीं की अब वह नहीं रहे।

दरअसल जनरल बिपिन रावत के उत्तराखंड स्थित पैतृक गांव सैणा में रहने वाले चाचा भरत सिंह रावत को अफसोस है कि उनके भतीजे की अगले साल अप्रैल में यहां आने और मकान बनाने की हसरत अधूरी रह गई. उनके भतीजा का ये सपना था की वह यहाँ आकर मकान बनाएगा पौड़ी जिले के द्वारीखाल प्रखंड के कांडाखाल कस्बे से कुछ ही दूरी पर स्थित दिवंगत जनरल रावत के इस छोटे से पैतृक सैणा गांव में केवल उनके चाचा का ही परिवार रहता है. सैणा गांव में कुल तीन मकान हैं, जिनमें से एक में उनका परिवार रहता है, जबकि दो अन्य खाली पडे़ हैं.

गमगीन स्तिथि में भरत सिंह रावत ने बताया  कि जनरल रावत का अपने गांव और घर से काफी लगाव था और बीच-बीच में वह उनसे फोन पर भी बात किया करते थे. जनरल रावत ने अपने चाचा को बताया था कि वह अप्रैल 2022 में फिर गांव आएंगे. उन्होंने बताया कि प्रमुख रक्षा अध्यक्ष अपने पैतृक गांव में एक मकान भी बनाना चाहते थे. आंखों से बहते आंसुओं को पोंछते हुए रावत ने कहा कि उन्हें क्या पता था कि उनके भतीजे की हसरतें अधूरी रह जाएंगी.उन्होंने बताया कि जनरल रावत आखिरी बार अपने गांव थल सेना अध्यक्ष बनने के बाद अप्रैल 2018 में आए थे जहां वह कुछ समय ठहरकर वह उसी दिन वापस चले गए थे.

जैसे ही जनरल रावत के निधन की सूचना मिलने के बाद से सैणा का माहौल गमगीन है और उनके चाचा, चाची, चचेरा भाई और उनकी पत्नी सबकी आंखों से अश्रुधारा बह रही है. आसपास के गांवों से सांत्वना देने पहुंचे लोगों की आंखें भी नम हैं. उन्होंने बताया कि बिपिन गरीबों के प्रति बड़े दयालु थे और बार-बार उनसे कहते थे कि सेवानिवृत्त होने के बाद वह अपने क्षेत्र के गरीबों के लिए कुछ करेंगे ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके. उनका ये सपना था की वह इस गांव के लिए कुछ करे ताकि लोग आर्थिक तंगी से न जूझ सके।