क्या आप भी करते है प्लास्टिक के डिब्बों में खाना पैक तो हो जाए सावधान, पनप सकती है शरीर में ये बड़ी बीमारियाँ


प्लास्टिक से बनी चीज़े मनुष्य व् जानवरो दोनों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। जहाँ इसका अविष्कार मानव जीवन के लिए ही किया गया था परन्तु आज के समय में इसका अधिक उपयोग में आना अब मनुष्य व् जानवरो दोनों के लिए घातक साबित हो रहा है। बता दे ये इंसानों के साथ ही जीव-जंतुओं की सांसों और भोजन में जहर घोलने का कार्य यह प्लास्टिक कर रहा है। ये विडंबना है कि प्लास्टिक के नुकसान के बारे में पता होने के बावजूद भी हमने इससे परहेज नहीं किया और भोजन रखने, पैक करने आदि में इसको उपयोग करने लगे।

दरअसल प्लास्टिक का उपयोग जितना कम हो सके उतना कम ही करना चाहिए। आपने अक्सर देखा होगा पैक्ड फ़ूड ज्यादातर प्लास्टिक में ही मिलते है जिसके बाद वह मनुष्य के शरीर को अंदर से भी खोखला करने में सक्षम होगये है। इतना ही नहीं बल्कि इससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुंच रही है।आजकल की पीढ़ी गरमा गरम खाने को प्लास्टिक की थैलियों और डिब्बों के पैक कर लेते हैं। वहीं रोटियों को एल्युमिनियम फॉयल में पैक किया जाता है। इससे गरम चीज के संपर्क में आते ही प्लास्टिक के डिब्बे में लगा कैमिकल हमारे शरीर में घुल जाता है। धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। उसी प्रकार एल्युमिनियम धीमे जहर का काम करता है।

आपको बता दे प्लास्टिक की थैलियों या प्लास्टिक के डिब्बे में खाना खाने से प्लास्टिक के साथ ही हमारे शरीर में कई हानिकारक कैमिकल पहुंच जाते हैं। इसमें सबसे खतरनाक ‘एंडोक्रिन डिस्ट्रक्टिंग केमिकल होता है, जो कि एक प्रकार का जहर है। यह हार्मोंस को असंतुलित कर देता है। इससे हार्मोंस काम करने की क्षमता खो देते हैं।एंडोक्रिन डिस्ट्रक्टिंग केमिकल धीमे जहर की तरह ही काम करता है। लंबे समय तक प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही अन्य बीमारियां होने की संभावना भी बनी रहती है, जिससे इंसान की मौत भी हो सकती है। वहीं माइक्रोवेव में भी प्लास्टिक के डिब्बे में खाना गर्म करने पर केमिकल खाने में मिल जाता है।इसलिए डॉक्टर्स की सलाह अनुसार प्लास्टिक का जितना प्रयोग कम किया जाए उतना बेहतर होगा।

आपको ये जानकर हैरानी होगी की कई रिसर्च में ये साबित हो चूका है की प्लास्टिक फूड कंटेनर्स के केमिकल्स से ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा रहता है। इससे पुरुषों में स्पर्म काउंट घटने की संभावना बढ़ जाती है। प्लास्टिक बोतल में पानी जमाने या लंबे समय तक प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। एक ही प्लास्टिक बोतल का बार बार उपयोग करना भी कैंसर का कारण बन सकता है। वहीं एल्युमिनियम के इस्तेमाल से इनटेक अल्जाइमर हो सकता है। रोजाना एल्युमिनियम का उपयोग करने से ब्रेन सेल्स की विकास दर घट जाती है।इसलिए इसे कम उपयोग में लाने की सलाह दी जाती है।