रोज हर इंसान करता है ये 5 से बड़ी गलतियाँ, इसलिए होता है कंगाल


आचार्य चाणक्य की नीतियों से हम सब अवगत है कि किस प्रकर का जीवम हमे अपनाना चाहिए| किन आदतों को छोड़ कर हम सुखी जीवन व्यतीत कर सकते है| कैसी आदते मनुष्य को नष्ट कर सकती है| आचार्य चाणक्य की तरह विदुर की नीतियां भी आज काफी प्रचलित है| यह नीतियां जीवन के कई पहलुओं में सहायक सिद्ध हुई है| यह नीतियों लोगो को सही रहा दिखने में सहायक है विदुर जी महाराज धृतराष्ट्र के भाई और महामंत्री थे। जानिए विदुर की नीतियों में वह कौनसी 6 आदते है जिन्हे त्यागने से एक व्यक्ति सुखी जीवन प्राप्त कर सकते है |

अभिमान न होना

मनुष्य को कभी भी अपने पर अभिमान नहीं होना चाहिए| जो व्यक्ति हर पल अपनी ही प्रसंशा करता रहता है, वह अभिमानी कहलाता है| ऐसे व्यक्ति के पास कोई नहीं रहना चाहता जो केवल खुद के बारे में ही सोचता है|

बेवजह न बोले

 

व्यक्ति को उतना ही बोलना चाहिए जितने की ज़रूरत हो अधिक और व्यर्थ में बोलने वाला व्यक्ति अक्सर परेशान रहता है क्योंकि वह अधिक बोलने के कारण कुछ ऐसा कह जाता है जिससे उसे बाद में पछताना पड़ता है|

गुस्से की आदत को छोड़े

 

गुस्सा आना मानव स्वभाव है, लेकिन अधिक गुस्सा नाश की जड़ बन जाता है और एक सुखी जीवन को बरबाद कर देता है| जो व्यक्ति बात-बात पर गुस्सा करता है वह खुद का नुकसान कर रहा होता है| सुखी जीवन के लिए आपको इस आदत को आज ही छोड़ना चाहिए|

त्याग और समर्पण की भावना न होना

जिस व्यक्ति में त्याग और समर्पण की भावना नहीं होती, वह व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रह सकता क्योकि वह केवल अपने ही बारे में सोचता रहता है| उसे किसी दूसरे व्यक्ति की परवाह नहीं होती| ऐसा व्यक्ति का समय पर कोई साथ नहीं देता|

धोखा न देना

व्यक्ति को किसी को धोखा नहीं देना चाहिए| जो व्यक्ति किसी को धोखा देता है वह खुद मुसीबत में ज़रूर फसता है| ऐसे समय पर उसका कोई साथ नहीं देता क्योंकि उस व्यक्ति पर कोई भरोसा नहीं करता है| एक लालची व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रहता क्योंकि लालच का कोई अंत नहीं होता| जिसके मन और दिमाग में लालच आ जाता है वह व्यक्ति सदैव परेशान रहता है| उसके लालच की कोई सीमा नहीं होती| ऐसे में इस आदत को जल्द ही त्याग दे|