6 साल पहले बिछड़ा था लड़का, आधार कार्ड की मदद से कुछ ऐसे हुआ माँ बेटे का मिलन।


आज के दौर में कोई छोटी सी चीज़ घूम जाए तो वो नहीं मिलता फिर बच्चा मिलना तो दूर की बात है लेकिन आज हम जो मामला आपको बताने जा रहे है वो सुनने के बाद आप सभी इमोशनल हो जाएंगे दरअसल 6 साल पहले एक मां से उसका मूक-बधिर बेटा बिछड़ गया था जिसके बाद उसकी माँ ने उसे खूब खोजा तब भी न मिला लेकिन एक दिन उसका जिगर टुकड़ा उसे मिल गया उसे किसी का फोन आया और उसदिन से उसकी ज़िन्दगी का नया पहलु शुरू हो गया आइये बताते है क्या है पूरा मामला।

दरअसल जब माँ ने सुना की उनका मूक बधिर लड़का मिला है जिसके आधार कार्ड से पता चला है कि ये उनका बेटा है आप आकर उसकी तसदीक कीजिए। मां के कान में ये आवाज आते ही उसकी सूखी आंखे में आंसू आ गए और वो अपना आधार कार्ड लेकर भरी आंखों से अपने बेटे को लेन के लिए तुरंत निकल पड़ी।बेंगलुरू के रहने वाले 19 साल के भरत चिकप्पा ना बोल सकते हैं और न ही सुन सकते हैं। आज से 6 साल पहले 13 की उम्र में मार्च 2016 में भरत अपने परिवार से बिछड़ गए थे। आधार कार्ड की वजह से फिर से अपनी मां के पास लौट आए।

माँ ने अपनी कहानी शेयर करते हुए सुनाया की वह जब भी किसी की आहट सुनती तो उन्हें लगता कि वह उसके बेटे कि आवाज़ है लेकिन ऐसा न हुआ  छह साल अपने जिगर के टुकड़े के बगैर इस मां ने कैसे बिताए हैं, सिर्फ वही जानती हैं। नागपुर के गवर्नमेंट शेल्टर होम में जब वर्षों बाद मां-बेटे का मिलन हुआ, तो वहां पर उपस्थित सभी लोग भावुक हो उठे।खबरों के मुताबिक, भरत की मां बेंगलुरू में स्थानीय स्तर की भाजपा नेता हैं। मार्च 2016 में भरत अपने घर से 20 रुपये लेकर चॉकलेट खरीदने निकले थे, फिर वो वापस नहीं लौटे। अक्टूबर 2016 में भरत नागपुर रेलवे स्टेशन पर मिले।

माँ ने बेटे को कई जगह ढूंढा लेकिन कुछ पता न लग पाया, जिसके बाद वहीं भरत दिन बीतने के साथ-साथ नागपुर के स्पेशल स्कूलों में कक्षा नौ तक की पढ़ाई की। दिसंबर 2021 में वह फिर से गवर्नमेंट शेल्टर होम में लौट आया। इस साल जनवरी में भरत के सेल्टर होम काउंसलर महेश रणदीप ने उसके लिए आधार कार्ड बनाने का फैसला किया।आधार सेवा केंद्र के प्रबंधक कैप्टन अनिल मराठे ने कहा कि भरत का नया आधार कार्ड तैयार करने की पहली कोशिश 4 फरवरी को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरू में आधार कार्ड के तकनीकी केंद्र से संपर्क किया, जहां पता चला कि इस बॉयोमेट्रिक चिन्ह का आधार कार्ड पहले से ही भरत कुमार बी के नाम से मौजूद है।

कहानी यहाँ तक पहुंची कि जब आधार सेवा केंद्र के प्रबंधक कैप्टन अनिल मराठे ने कहा कि भरत का नया आधार कार्ड तैयार करने की पहली कोशिश 4 फरवरी को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरू में आधार कार्ड के तकनीकी केंद्र से संपर्क किया, जहां पता चला कि इस बॉयोमेट्रिक चिन्ह का आधार कार्ड पहले से ही भरत कुमार बी के नाम से मौजूद है।जिसके बाद माँ का मिलन बच्चे से होना तय होगया फिर 7 मार्च को बेंगलुरू पुलिस के माध्यम से भरत की मां को सूचना दी गई। अगले ही दिन बेंगलुरू पुलिस के साथ भरत की मां नागपुर पहुंची। अपने कलेजे के टुकड़े को 6 साल बाद देख मां बेहद भावुक हो उठीं। अगले दिन अदालत के आदेश के बाद भरत अपनी मां के साथ घर के लिए रवाना हो गया।