बुजुर्ग सास-ससुर को परेशान करने वाली बहू के खिलाफ Delhi High Court ने सुनाया ये अहम फैसला, जाने यहाँ।


वक़्त इतना बदल गया है की इंसान अब इंसान को देख कर खुश नहीं चाहे बात अपने माँ-बाप की हो या सांस-ससुर की वक़्त ने बुरी तरह की बाजी मारी है जहाँ इंसान,इंसान का ही दुश्मन बन बैठा है। माहौल को देख कर कई नियम में भी बदलाव होना शुरू हो गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अब कड़े नियम लागू कर दिए है जिसके तहत कोई भी व्यक्ति अगर इसके अंतर्गत पाया जाता है तो उसपर कड़ी से कड़ी सजा का आदेश दिया जाएगा।

न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में दोनों ससुराल वाले वरिष्ठ नागरिक हैं जो शांति से जीने के हकदार हैं और अपने बेटे और बहू के बीच वैवाहिक कलह से प्रभावित नहीं होने के हकदार हैं. अदालत ने आदेश में कहा कि चूंकि दोनों पक्षों में संबंध ठीक नहीं है, इसलिए जीवन के अंत में यह उचित नहीं होगा कि वृद्ध माता-पिता अपीलकर्ता के साथ रहें और इसलिए यह उचित होगा यदि अपीलकर्ता को एक वैकल्पिक आवास प्रदान किया जाता है, जैसा कि घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम की धारा 19 (1) (एफ) के तहत दिए गए आदेश में निर्देशित है.

अदालत ने कहा कि पार्टियों के बीच संबंध “सौहार्दपूर्ण” नहीं थे और यहां तक ​​​​कि पति द्वारा अपनी पत्नी के खिलाफ शिकायत भी की गई थी, जो अलग किराये के आवास में रहते थे और उन्होंने विषय संपत्ति में किसी भी अधिकार का दावा नहीं किया है. कोर्ट ने कहा कि डीवी अधिनियम की धारा 19 के तहत निवास का अधिकार, साझा घर में निवास का एक अपरिहार्य अधिकार नहीं है, खासकर, जब बहू, वृद्ध ससुर और सास के खिलाफ हो.

इस मामले में, दोनों लगभग 74 और 69 वर्ष की आयु के वरिष्ठ नागरिक होने के नाते और अपने जीवन के आखिरी वक्त में होने के कारण, शांति से जीने के हकदार हैं और उन्हें अपने बेटे और बहू के बीच वैवाहिक कलह का शिकार नहीं होना चाहिए,इस मामले में उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है.जिसे अब लोगो द्वारा खूब सहराया जा रहा है।