खुद चौथी पास होकर भी परिवार के सदस्यों को बनाया IAS, IPS जैसे बड़े- बड़े अफसर, नहीं रहे चौधरी बसंत सिंह


चौधरी बसंत सिंह श्योंकद, जिनका हाल ही में निधन हुआ है, वे अपने जीवन में ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए। वे केवल चौथी पास थे फिर भी उन्होंने अपने परिवार की पढ़ाई-लिखाई में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। नतीजा यह हुआ कि अकेले उनके परिवार ने इस देश को दो IAS और एक IPS ऑफिसर के अलावा क्लास वन के 11 ऑफिसर दिए हैं।

हरियाणा के डूमरखां कलां का है चौधरी का परिवार

 

यह परिवार हरियाणा के जींद जिले के डूमरखां कलां गांव का रहने वाला है। बीते मई में ही चौधरी बसंत सिंह ने दुनिया को अलविदा कहा है, चौथी कक्षा पास कर पाए। फिर भी पढ़ाई का मोल अच्छे से समझा और अपने बच्चों को पढ़ने-लिखने व आगे बढ़ने का भरपूर अवसर दिया। नतीजा यह हुआ कि अकेले उनके परिवार ने इस देश को दो IAS और एक IPS ऑफिसर के अलावा क्लास वन के 11 ऑफिसर बन गए हैं। मगर जब तक वे जिंदा रहे उन्होंने हमेशा पढ़े-लिखे, बड़े लोगों और अफसरों से ही दोस्ती रखी थी। खुद ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं होने के बावजूद उन्होंने अपने चारों बेटों और तीनों बेटियों को यही संस्कार दिए कि वे अच्छी तरह से पढ़ाई करके ऑफिसर बन जाएं। उनके बच्चों ने मेहनत भी की और अपने पिता के सपनों को सच कर दिखाया।

इन अधिकारियों से भरा है घर

 

चौधरी बसंत सिंह के बेटे-बेटी, बहु और पोती ग्रेड वन अफिसर हैं। उनके चारों बेटे क्लास वनअधिकारी हैं, जबकि बहु और पोता-पोती आईएएस हैं। वहीं उनकी पोती IRS अफसर है। बसंत सिंह के बड़े बेटे रामकुमार श्योकंद रिटायर्ड प्रोफेसर हैं और उनका बेटा यशेंद्र आईएएस है और बेटी स्मिति चौधरी अंबाला में बतौर रेलवे एसपी तैनात हैं। स्मिति के पति बीएसएफ में आईजी हैं। वहीं चौधरी बसंत के दूसरे बेटे कॉन्फेड में जीएम थे और उनकी पत्नी डिप्टी डीइओ रह चुकी हैं।

सबने एक दूसरे को आगे बढ़ने का उठाया जिम्मा

 

बहु-बेटे, पोता-पोती सभी किसी न किसी ग्रेड वन पोस्ट पर तैयात रहे हैं। तीसरे बेटे वीरेंद्र एसई थे। इनकी पत्नी इंडियन एयरलाइंस में डिप्टी मैनेजर रही हैं। बसंत सिंह के चौथे बेटे का नाम गजेंद्र सिंह हैं। ये भारतीय सेना में कर्नल पद रिटायर हुए हैं। वर्तमान में बतौर निजी पायलट सेवाएं दे रहे हैं। घर में सभी ने एक दूसरे को आगे बढ़ाने का जिम्मा उठाया। चौधरी बसंत ने अपने बच्चों को और उनके बच्चों ने अपने भाई-बहन और बच्चों को आगे बढ़ाया। इतना ही नहीं जिंद में उन्होंने प्रतिभावान छात्र और छात्रा को गोद भी लिया और उनकी पढ़ाई का खर्चा उठाया। वर्तमान ये दोनों ही कॉलेज में उच्च अध्ययन कर रहे हैं। चौधरी बसंत सिंह मूलरूप से खेती किया करते थे।