ग्राहकों को सस्ती और डिस्काउंट का लालच देने में मशहूर कंपनी Maruti Suzuki पर लगा 200 करोड़ का जुर्माना


कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी Maruti Suzuki पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. CCI बाजार में कॉम्पिटीशन लेवल पर नज़र रखता है, ऐसे में उसने Maruti Suzuki की एक पॉलिसी को प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन करने वाला पाया है. पढ़ें पूरा मामला. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने Maruti Suzuki की Discount Control Policy को एंटी-कॉम्पिटीटिव पाया. साथ ही इस पॉलिसी को लागू करने के लिए कंपनी जो तरीका अपनाती है उस पर भी सवाल खड़ा किया.

Maruti Suzuki देशभर में फैले अपने डीलर नेटवर्क के लिए ये Discount Control Policy लागू करती है. इस पॉलिसी के हिसाब से कंपनी के डीलर कार की बिक्री के लिए अपने ग्राहकों को कोई एक्स्ट्रा डिस्काउंट या कोई मुफ्त तोहफा नहीं दे सकते. वो ग्राहकों को सिर्फ कंपनी मंजूर ऑफर ही दे सकते हैं. इतना ही नहीं CCI ने अपने आदेश में Maruti Suzuki के इस पॉलिसी को लागू करने के तरीके पर भी सवाल खड़े किए. उसने कहा कि यदि कंपनी का कोई डीलर कंपनी की मंजूरी के बिना कोई ऑफर देता है और Discount Control Policy का उल्लंघन करने वाला पाया जाता है.

तो कंपनी ना सिर्फ डीलर पर जुर्माना लगाने की ध-म-की देती है, बल्कि उस डीलर के यहां कार की बिक्री करने वाले सेल्स एक्जीक्यूटिव, रीजनल मैनेजर, शोरूम मैनेजर, टीम लीडर इत्यादि पर भी जुर्माना लगाती है. साथ ही डीलर को कारों की आपूर्ति रोकने जैसी कड़ी कार्रवाई करने के लिए भी धमकाती है. इतना ही नहीं कंपनी अपनी Discount Control Policy को लागू करने के लिए ‘Mystery Shopping Agencies’ (MSAs) का सहारा लेती है.

वह इन एजेंसियों के माध्यम से अपने डीलर के पास एजेंट्स को ग्राहक बनाकर भेजती है ताकि पता कर सके कि कहीं कोई डीलर ग्राहकों को एक्स्ट्रा डिस्काउंट तो नहीं दे रहा. CCI का मानना है कि कंपनी का ये व्यवहार 2002 के प्रतिस्पर्धा कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है. ये देश में बाजार की प्रतिस्पर्धा पर विपरीत असर डालता है, इसलिए उसने कंपनी पर 200 करोड़ का जुर्माना लगाया है.

CCI के 23 अगस्त के इस फैसले पर Maruti Suzuki ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है. पीटीआई की खबर के मुताबिक कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि Maruti Suzuki हमेशा ग्राहकों के हित में काम करती आई है और आगे भी करती रहेगी. कंपनी इस फैसले का अध्ययन कर रही है और कानून के दायरे में रहकर उचित कदम उठाएगी.