बॉलीवुड फ़िल्में जो अपनी रोमांटिक लव स्टोरी के लिए जानी जाती है लेकिन असल में है कूड़ा…


बॉलीवुड इंडस्ट्री में अब तक कई फिल्मे बन चुकी है कई थ्रिलर्स होती है कईओ में कंटेंट रोमांटिक होता है कई फिल्मो में एक्शन से जुड़ा कंटेंट देखने को मिलता है। लेकिन जो जगह अभी तक  रोमांटिक  फिल्मो की है उसकी जगह कोई और नहीं बना पाया अभी तक। कुछ लोग तो मूवी में दर्शाए गए रोमांस को ही आइडियल मान बैठते हैं. लेकिन जान लीजिए जनाब, हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री आपको कई सालों से झांसे में रख रही है. कितनी फ़िल्में आईं और गईं, लेकिन बॉलीवुड अपनी अल्पविकसित विचार प्रक्रिया से बाहर नहीं आ पाया है.  आइये आपको दिखाते है कुछ ऐसी फिल्मे।

इस फिल्म में आदित्य कपूर और श्रद्धा कपूर लीड रोल में थे, दोनों ने इस फिल्म से डेब्यू किया था। जो बेहद हिट साबित हुई थी। कुछ लोगों को तो ये मूवी इतनी पसंद आई थी कि उन्होंने एक या दो बार नहीं, बल्कि कई बार इस मूवी को देख डाला था. हालांकि, अगर इस लव स्टोरी की बारीकियों पर नज़र डालें, तो फ़िल्म में जैसे ही राहुल की गर्लफ्रेंड आरोही पर स्पॉटलाइट पड़ती है, वो उसकी ज़िंदगी ख़राब करने में कोई कसर नहीं छोड़ता है. फिर भी आरोही उसे संभालने की कोशिश करती है, लेकिन राहुल को सुधरने के बजाय अपनी जान लेना ज़्यादा आसान लगता है. ये मूवी इस बात का सटीक उदाहरण है कि ऐसी रिलेशनशिप का रियल लाइफ़ में कभी अस्तित्व ही नहीं होना चाहिए.

इस फिल्म ने कई दर्शको का अच्छे से मनोरंजन किया था लेकिन कुछ लोगो ने फिल्म को बेकार बताया था। दर्शको के लिहाज से इस मूवी का हर एक कैरेक्टर प्रॉब्लम करने वाला है. यहां तक नैना (प्रीति ज़िंटा) जो एक मज़बूत लड़की दिखाई गई है, उसका भी कोई ओपिनियन नहीं होता, जब उसे अपने पार्टनर को चूज़ करना होता है. इस मूवी में लव ट्राएंगल दिखाया है, पर उसमें लॉजिक की भारी कमी है.दर्शको ने इस फिल्म के कंटेंट में भारी कमी निकाली थी।

कहने को तो ये फिल्म सुपरहिट थी लेकिन इसमें कंटेंट की भारी कमी थी। कबीर (शाहिद कपूर) भले ही एक पढ़ा-लिखा डॉक्टर है, लेकिन फ़िल्म में उसकी सोच अनपढ़ व्यक्तियों से भी संकीर्ण दिखाई गई है. वो प्रीति (कियारा आडवाणी) को एक नौकर की तरह ट्रीट करता है. वो चाहे प्रीति के साथ कितना भी बुरा बर्ताव कर ले, लेकिन वो फिर भी उसके पास ही लौट कर आती है. ये फ़िल्म साबित करती है कि बॉलीवुड फ़िल्ममेकर्स की मानसकिता कितनी स्त्री द्वेष पूर्ण है. इसका कंटेंट भी कुछ ख़ास नहीं है।

कहने को तो ये एक बेस्ट लव स्टोरी फिल्म में से एक है लेकिन इसमें राहुल (शाहरुख़ ख़ान) के प्यार करने का लॉजिक एकदम पल्ले नहीं पड़ा. फ़िल्म में जब अंजलि (काजोल) अपनी चॉइस के हिसाब से कंफ़र्टेबल तरीक़े से ड्रेस अप होती है, तो वो उसे सिर्फ़ दोस्त वाली नज़र से देखता है. पर जब वो समाज द्वारा बनाए गए एक स्टीरियोटाइप के मुताबिक़ साड़ी पहनती है और लंबे बाल कर लेती है, तब राहुल के मन में उसके लिए कुछ-कुछ होने लगता है. क्या इसका मतलब जब वो घर पर कंफ़र्टेबल पायजामा या नाइट सूट में होगी, तब वो उससे प्यार नहीं करेगा?